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प्रेरकों की पांच करोड़ के भुगतान की रिपोर्ट पर मारी कुंडली

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पांच करोड़ भुगतान की रिपोर्ट दबाए बैठे बीएसए, कार्रवाई की चेतावनी
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साक्षर भारत योजना के 1796 प्रेरकों का दो साल से बकाया है मानदेय
माई सिटी रिपोर्टर
गोंडा। साक्षर भारत मिशन से लोक शिक्षा समिति के केंद्रों पर कार्यरत रहे 1796 शिक्षा प्रेरकों के मानदेय का 5 करोड़ रुपये बेसिक शिक्षा विभाग दो साल से दबाए बैठा है। प्रेरकों के मानदेय का भुगतान जिलों से सूचना ने भेजे जाने से फंसा हुआ है। बीते 24 अक्तूबर को अमर उजाला में 1796 प्रेरकों का दो साल से फंसा पांच करोड़ शीर्षक से प्रकाशित किया गया था। इसके बाद भुगतान को लेकर निदेशक साक्षरता ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विभाग को सूचना देने पर लापरवाही बरतने पर कड़ी फटकार लगाई है और 31 अक्तूबर तक पूरी प्रेरकों के भुगतान की रिपोर्ट मांगी है।
निदेशक ने स्पष्ट कहा है कि रिपोर्ट देने में लापरवाही हुई तो बीएसए के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है बीएसए की हीलाहवाली से जिले मे कार्यरत रहे शिक्षा प्रेरकों का दो साल से बकाया मानदेय उन्हें नहीं मिल पा रहा है। सरकार यह योजना भी दो साल पहले बंद कर चुकी है बावजूद इसके प्रेरक मानदेय की मांग को लेकर भटक रहे हैं। बीएसए की इस शिथिलता पर निदेशक साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा विजय किरन आनंद ने नाराजगी जताई है और प्रेरकों के मानदेय भुगतान संबंधित सूचना तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। समय से सूचना न मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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शिक्षा के बढ़ावा देने और गांव के अनपढ़ों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में साक्षर भारत मिशन योजना प्रारंभ की थी। इसके तहत गांवों मे लोक शिक्षा समिति का गठन किया गया था और समिति के केंद्रों पर शिक्षा प्रेरक की तैनाती की गई थी। उस समय जिले भर मे करीब 1800 शिक्षा प्रेरक रखे गए थे। पांच वर्ष तक इस योजना के संचालन के बाद शासन ने वर्ष 2018 में इस योजना को बंद कर दिया तो इन केंद्रों पर तैनात प्रेरक बेरोजगार हो गए। लेकिन योजना बंद होने के बाद इनके दो साल के बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। जबकि निदेशालय से मानदेय भुगतान की धनराशि दारी की जा चुकी है।
निदेशालय ने कई बार बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से आवंटित की गई धनराशि के खर्च व अवशेष तथा बकाया मानदेय भुगतान के संबंध मे जानकारी मांगी लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने कभी आडिट के कभी अन्य किसी कमी की वजह बताकर यह सूचना विभाग को नहीं उपलब्ध कराई। पिछले डेढ़ माह से सर्व निदेशक साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा विजय किरन आनंद इन प्रेरकों के बकाया भुगतान व आवंटित की गई धनराशि की ब्योरा उपलब्ध कराने के लिए बीएसए को पत्र लिख रहे हैं लेकिन बीएसए उन्हें सूचना नहीं दे रहे हैं। बृहस्पतिवार को एक बार फिर निदेशक ने बीएसए को पत्र लिखकर सूचना न देने पर नाराजगी जताई है और इस संबंध मे वांछित सूचना तत्काल मांगी है। सूचना न मिलने पर इस बार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
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इनसेट
एक साल पहले शासन से मानदेय के लिए मांगा था 5.18 करोड़
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से प्रेरकों व साक्षरता समन्वयकों के मानदेय के भुगतान के लिए बजट की मांग की जा चुकी है। एक साल पहले मानदेय भुगतान के लिए 5.18 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया था। उस मांग पत्र पर कोई बजट निर्गत नहीं किया गया, जिससे अभी तक भुगतान नहीं हो सका है। अब एक बार फिर से प्रेरकों के मानदेय की रिपोर्ट मांगी गई है। माना जा रहा है कि निदेशालय स्तर पर मांग पत्र की अनदेखी की गई, उसे संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। जिले पर भी भुगतान को लेकर सिर्फ पत्राचार तक सीमित है।
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