गोंडा। अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के साथ ही पौराणिक स्थलों के पर्यटन विकास की उम्मीदें जगी हैं। करनैलगंज के नरायनपुर ललक में सरयू तट पर स्थित जंबू तीर्थ के विकास के लिए स्थानीय लोग एकजुट हो रहे हैं।
84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में जंबू तीर्थ होने के बाद भी परिपथ की योजना में जंबू तीर्थ को शामिल न किए जाने से लोगों को झटका लगा है। तीर्थ के महंत मोहनदास त्यागी ने मुख्यमंत्री को तीर्थ को परिक्रमा परिपथ में शामिल किए जाने की मांग किया है।
धार्मिक रूप से जंबू तीर्थ का काफी महत्व है और सरयू के तट पर स्थल होने से अयोध्या धाम से सीधा जुड़ा है। 84 कोसी परिक्रमा में परिक्रमार्थियों का जत्था जब बाराबंकी से जिले की सीमा में प्रवेश करता है तो परसपुर के बहुवन मदार माझा के दुलारे बाग में पहला पड़ाव पड़ता है।
इसके बाद चरसड़ी होते हुए सीधे जंबू तीर्थ पर विश्राम के साथ ही पूजन अर्चन करके ही आगे बढ़ता है। परिक्रमा में इस पौराणिक स्थल का काफी महत्व है। सरयू तट पर आश्रम के साथ ही मंदिर भी है और हर साल कार्तिक अक्षय राम नवमी पर विशाल मेला भी लगता है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से 84 कोसी परिक्रमा के परिपथ निर्माण की योजना तैयार हुई है।
जिसमें परिक्रमा पथ में सबसे महत्वपूर्ण स्थल जंबू तीर्थ को शामिल न किया जाना चौंकाने वाला है। इससे करनैलगंज के श्रद्धालुओं को झटका लगा है और वह अब एकजुट हो रहे हैं। पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने पीडब्लूडी के साथ ही एनएच के अधिकारियों से वार्ता किया।
अभी तक इस योजना का कोई खाका तैयार नहीं हुआ है। लेकिन करनैलगंज क्षेत्रों में सत्ता पक्ष की होर्डिंग में जिस परिक्रमा परिपथ का उल्लेख है, उसमें जंबू तीर्थ का नाम ही नहीं है। इससे क्षेत्र के लोगों को चिंता सता रही है। इसके लिए अब स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
करनैलगंज के जंबू तीर्थ के महत्व को 119 साल पहले अंग्रेज अधिकारी ने महसूस किया था। 1902 में अंग्रेज अफसर आरसी होबर्ट ने शिला लेख लगवाया था। उस समय अंग्रेजी अफसर ने 84 कोसी परिक्रमा मार्गों पर 148 शिलालेख एबवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचना सभा के माध्यम से शिलालेख लगवाए और जंबू तीर्थ पर भी शिलालेख 140, 141, 142 लगवाकर पहचान देनेे का काम किया।
उसम समय के महंथ राम मनोहर प्रसादाचार्य ने स्थान का विकास किया। इसके बाद स्थान के पर्यटन विकास के लिए प्रयास न होने पर महंथ मोहनदास ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अब अयोध्या धाम से जोड़कर जंबू तीर्थ का विकास होना चाहिए।
करनैलगंज के नरायनपुर ललक में स्थित जंबू तीर्थ के पर्यटन विकास के लिए अब जनता आगे आएगी। इसके लिए 29 सितंबर को पौराणिक स्थल पर जन सम्मेलन होगा। पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों से स्थल के विकास के लिए राय ली जाएगी।
परिक्रमा परिपथ में स्थल को शामिल कराने के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में विकास के लिए आवाज बुलंद होगी। जिले में धार्मिक स्थलों की कड़ी में जंबू तीर्थ सबसे अहम हैं। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।