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खून की खरीद फरोख्त में स्वास्थ्य कर्मी समेत 13 पर केस, 5 गिरफ्तार

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गोंडा के पुलिस लाइन सभागार में खून के खरीद फरोख्त में पकड़े गये लोगो के साथ डीएम व एसपी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। लाल खून के काले कारोबार का राजफाश हुआ है। औषधि विभाग की टीम ने एक निजी अस्पताल में पुलिस टीम के साथ छापा मारकर पैसे लेकर मरीजों को खून बेचने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
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पूछताछ में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी की मिलीभगत भी सामने आई। मामले में 13 नामजद समेत अन्य के खिलाफ नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही व पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडेय ने कार्रवाई की जानकारी दी।
जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने बताया कि औषधि निरीक्षक ओम प्रकाश ने दुखहरण नाथ मंदिर के समीप स्थित एससीपीएम हॉस्पिटल में छापा मारा। औषधि निरीक्षक की ओर से रिपोर्ट दी गई कि दोपहर करीब दो बजे कुछ लोग खून को लेकर कहासुनी कर रहे थे।
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पता चला कि नगर कोतवाली के पटेलनगर निवासी बसंत उर्फ बसंतू गुप्ता व बलरामपुर के तुलसीपुर थाना क्षेत्र के ओढ़ाझार निवासी सलाहुद्दीन मरीजों को खून दिलाने के नाम पर पैसा लेते हैं। औषधि निरीक्षक के मुताबिक द गोल्डेन ब्लड संस्था आवास विकास कॉलोनी के अलमास खान निवासी बड़गांव, मो. इमरान व अली इलियाज निवासी मेवातियान व संस्था के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अवैध तरीके से खून का कारोबार किया जा रहा है।
पूछताछ में एससीपीएम हॉस्पिटल व जिला अस्पताल के कर्मियों के साथ मिलकर इन लोगों ने खून के अवैध कारोबार की बात स्वीकार की। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि औषधि निरीक्षक की तहरीर पर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी राजकुमार चौधरी समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पांच लोगों की गिरफ्तारी कर ली गई है और अन्य लोगों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। एसपी ने बताया कि मामले में बसंत उर्फ बसन्तू गुप्ता, सलाहुद्दीन, अलमास खान, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद इलियास को गिरफ्तार किया गया है।
द गोल्डेन ब्लड संस्था को सीएमएस के यहां से खून के क्रय विक्रय व भंडारण की कोई अनुमति नहीं है। यही नहीं, औषधि विभाग से भी इनको कोई लाइसेंस नहीं मिला है। सिटी मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी व सीएमओ डॉ. अजय सिंह गौतम ने भी ब्लड बैंक पहुंचकर जानकारी ली।
जिलाधिकारी मार्केंडेय शाही ने बताया कि जिला अस्पताल से खून के कारोबार का वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें एक महिला तीमारदार से दो युनिट खून के बदले सात हजार रुपये की वसूलने की बात सामने आई थी।
इस मामले में जांच के बाद हास्पिटल के एक संविदा कर्मी का नाम सामने आया था जिसे तत्काल बर्खास्त कर दिया गया था और पूरे मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई थी।
सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में अब इस पूरे कारोबार का खुलासा हुआ है। द गोल्डन ब्लड नाम की संस्था की आड़ में यह पूरा रैकेट संचालित किया जा रहा था। जिसमें जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का कर्मचारी व एक निजी हास्पिटल का कर्मचारी भी शामिल था। आगे अभी जांच चल रही है और जो भी नाम सामने आयेंगे उन सबके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
खून के इस काले कारोबार के खुलासे ने जिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह से इस कारोबार में ब्लड बैंक के कर्मचारी से लेकर एक निजी नर्सिंग होम के कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई है उससे यह साफ है कि खून का यह कारोबार काफी दिनों से संचालित किया जा रहा था।
खून की दलाली करने वाले आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने द गोल्डन ब्लड नाम से एक संस्था भी बना डाली और उसी की आड़ में कारोबार संचालित किया जाने लगा।
जांच में इस संस्था का न तो रजिस्ट्रेशन पाया गया और न ही कोई लाइसेंस। इससे भी यह बात साफ हो जाती है कि अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह पूरा रैकेट संचालित हो रहा था जो जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाता था और उनसे खून के बदले मोटी रकम वसूल करता था।
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