गोंडा। भीषण गर्मी में जहां मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है, वहीं डॉक्टरों की लेटलतीफी मरीजों का दर्द और भी बढ़ा रही है। शुक्रवार को सुबह नौ बजे प्राचार्य के औचक निरीक्षण में एक बार फिर अधिकांश ओपीडी खाली मिलीं। इस पर छह डॉक्टरों को नोटिस दिया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो चुकी हैं। भीषण तपिश व गर्मी से बचने के लिए मरीज सुबह जल्दी अस्पताल आते हैं, लेकिन डॉक्टरों के समय से न पहुंचने के कारण उन्हें ओपीडी के बाहर लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्राचार्य की चेतावनी के बावजूद डॉक्टरों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। विगत 11 जून को प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने सुबह साढ़े नौ बजे औचक निरीक्षण किया था, जिसमें सभी डॉक्टरों की ओपीडी खाली मिलीं तथा बड़ी संख्या में मरीज इंतजार करते मिले थे। जबकि ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। शुक्रवार को सुबह नौ बजे फिर प्राचार्य ने बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। जिसमें सर्जरी विभाग में डॉ. वीके गुप्ता व हड्डी विभाग में डॉ. पीएन सिंह के अलावा सभी विभागों की ओपीडी खाली मिलीं। प्राचार्य ने वार्डों में जाकर निरीक्षण किया तो वहां भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। जिस पर नाराजगी जताते हुए प्राचार्य ने चिकित्सा अधीक्षक से डॉक्टरों की ड्यूटी लिस्ट तथा उपस्थिति रजिस्टर तलब किया। प्राचार्य ने बताया कि जिन डॉक्टरों की ड्यूटी थी और वह अनुपस्थित रहे। उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। जो डॉक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाएगा, उसका एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के अधिकांश डॉक्टर हॉस्पिटल के सामने ही गली में अपना प्राइवेट प्रैक्टिस सेंटर संचालित करते हैं। जहां सुबह सात बजे से लेकर मरीजों की संख्या के अनुसार नौ से 10 बजे तक फीस लेकर उपचार करते हैं। जिससे मेडिकल कॉलेज की ओपीडी खाली रहती है। जबकि दूरदराज से आने वाले मरीजों को देर से डॉक्टर का परामर्श मिलता है, तब तक पैथालॉजी में पंजीकरण बंद हो जाता है। जिससे उन्हें दूसरे दिन फिर आना पड़ता है।