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15 साल बाद फिर 42 स्कूलों को अनुदान की उम्मीद

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गोंडा। हाईकोर्ट ने एक स्कूल को अनुदान दिये जाने का आदेश दिया है। शिक्षकों व कर्मचारियों को साल 2006 से वेतन का भुगतान करने को कहा है। इस फैसले के बाद साल 2006 से अनुदान मिलने की उम्मीद लगाए 42 स्कूलों के सपनों को पंख लगे हैं।
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निजी संसाधन से संचालित हो रहे स्कूलों को अनुदान दिये जाने का मामला कई सालों से हाईकोर्ट में चल रहा है और शासन स्तर से भी लिखा पढ़ी चल रही है। अब हाईकोर्ट के कड़े फैसले से इन स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों में वेतन मिलने की उम्मीद जगी है।
सरकारी अनुदान दिये जाने के लिए पहले से ही कार्रवाई चल रही है। 2017 में आठ स्कूलों को अनुदान दिया गया था और बाद में अनुदान वापस लिये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इससे स्कूलों के प्रबंधक हाईकोर्ट गये। जहां से राहत मिली।
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वहीं 27 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने सुखदेव सिंह कन्या लघु माध्यमिक विद्यालय के मामले में अनुदान दिये जाने का आदेश दिया है। वेतन का भुगतान साल 2006 से एरियर सहित करने को कहा है। इसके बाद स्कूलों के शिक्षकों के चेहरे खिल गये हैं। बीते माह में बीएसए की ओर से 42 स्कूलों में छह स्कूलों का प्रस्ताव भी भेज चुके हैं। अब एक बार फिर अनुदान के लिए दांवपेंच शुरू हो गये हैं।
साल 2006 में जिले के 42 स्कूलों को अनुदान सूची में लिये जाने का प्रस्ताव जा चुका है। अब फिर से प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं जिसमें छह स्कूलों का प्रस्ताव बीते दिनों बीएसए ने भेजा है।
जिसमें जगदंबा प्रसाद स्मारक बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय पोर्टरगंज, इंडिया इंडियन पब्लिक गर्ल्स जूनियर हाईस्कूल मिझौरा परसपुर, परसपुर ग्राम्य विकास आदर्श बालिका जूनियर हाईस्कूल परसपुर, देवता प्रसाद स्मारक बालिका जूनियर हाईस्कूल परसपुर, बसेरा बालिका विद्यालय रूद्रगढ नौसी तथा भैय्या प्रताप आदित्य लघु माध्यमिक विद्यालय का प्रस्ताव गया है।
अनुदान के लिए स्कूलों की ओर से प्रयास हो रहे हैं और हाईकोर्ट के आदेश से लोगों में खुशी है। लेकिन शासन स्तर से एडेड स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियां विवादों से भी घिरी है।
पूर्व के 27 सहायता प्राप्त स्कूल जांच के दायरे में हैं और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि शासन ने इन स्कूलों में नियुक्त करीब 150 शिक्षकों के चयन पर सवाल उठा चुका है। अब शासन के नये फैसले पर लोगों की निगाहें टिकी है।
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