गोंडा। छोटी दीपावली पर दीपदान किए जाने की परंपरा तीन साल में ही खत्म हो गई। इस बार न राधाकुंड तालाब पर दीपदान हुआ और न ही लोगों ने राधाकुंड तालाब पर जमा होकर सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। मामले की शिकायत नगर पालिका गोंडा के सभासदों ने पालिका के अधिशासी अधिकारी से कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
गोंडा शहर के बीचोंबीच स्थित राधाकुंड तालाब अपनी ऐतिहासिकता के लिए जाना जाता है। इसके सौंदर्यीकरण पर बीते एक दशक से अब तक दो करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके न तो तालाब का किसी प्रकार का कोई सौंदर्यीकरण हुआ है और न ही सफाई। तीन साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी रामबहादुर ने खुद इसके लिए सफाई अभियान शुरू किया। इतना ही नहीं दीपावली से एक दिन पहले छोटी दीपावली पर राधाकुंड तालाब पर दीपदान किए जाने की प्रथा की शुरूआत भी उन्होंने ही की। जिसमें सरकारी विभागों के अधिकारियों से लेकर शहर की आम जनता से भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। तीन वर्षों तक लगातार इस परंपरा का पालन हुआ। लेकिन इस बार छोटी दीपावली पर राधाकुंड तालाब पर कोई दीपदान करने ही नहीं गया। यही नहीं दीपदान के लिए पालिका स्तर से भी कोई प्रयास नहीं किया गया। न ही तालाब की सफाई कराई गई। इसे लेकर नगर पालिका के कुछ सभासदों ने अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर इस आयोजन में अपनी भूमिका न अदा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सभासद वेदप्रकाश शुक्ला, रईसा, सैय्यद मसऊद अली सहित अन्य का कहना है कि दीपदान के बहाने हर साल तालाब की सफाई हो जाया करती थी। साथ ही काफी लोग जुटते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।