गोंडा। भीषण गर्मी के दौरान देवीपाटन मंडल में बिजली व्यवस्था की खामियां उजागर हुई हैं। पावर कॉर्पोरेशन की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 63 केवीए क्षमता वाले छोटे ट्रांसफार्मरों के फुंकने की घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 26.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
एक अप्रैल से तीन जुलाई तक गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में 4,353 छोटे ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 3,439 थी। रिपोर्ट के आधार पर अनुरक्षण कार्यों में लापरवाही मानते हुए संबंधित अवर अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। समीक्षा में सामने आया कि फरवरी और मार्च में विशेष अनुरक्षण अभियान चलाकर तकनीकी कमियां दूर करने का दावा किया गया था। इसके बावजूद छोटे ट्रांसफार्मरों के फुंकने की घटनाएं बढ़ने से अनुरक्षण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। चारों जिलों के सभी 10 विद्युत वितरण खंडों की समीक्षा में कई स्थानों पर लापरवाही मिलने पर मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने इसे गंभीर माना है।
गोंडा में सबसे अधिक ट्रांसफार्मर हुए क्षतिग्रस्त
रिपोर्ट के अनुसार, गोंडा जिले में सबसे अधिक 2,112 छोटे ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1,457 थी। बलरामपुर में 579 के मुकाबले 840 ट्रांसफार्मर फुंके। श्रावस्ती में यह संख्या 514 से बढ़कर 539 हो गई। केवल बहराइच में मामूली राहत रही, जहां पिछले वर्ष 889 के मुकाबले इस बार 862 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, 100 केवीए और उससे अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। 100 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के फुंकने की संख्या 110 से घटकर 88 रह गई।
पीआर लंबित रहने से उपभोक्ताओं को उठानी पड़ी परेशानी
छोटे ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को कई दिनों तक बिजली संकट का सामना करना पड़ा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के भय से कई अवर अभियंता समय पर पीआर (प्रपोजल रिपोर्ट) नहीं भेज रहे हैं। पीआर लंबित रहने से कार्यशाला से नया ट्रांसफार्मर जारी नहीं हो पाता, जिससे उसे बदलने में अनावश्यक देरी होती है। कई मामलों में उपभोक्ताओं को शिकायत लेकर मुख्य अभियंता कार्यालय तक पहुंचना पड़ा।