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मनरेगा श्रमिकों के लिए 68 लाख मानव दिवस सृजित होंगे

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गोंडा। जिले में मनरेगा से अब सिर्फ विकास के कार्य ही नहीं, किसानों की किस्मत भी बदलने की तैयारी है। नये वित्तीय वर्ष में किसानों को मनरेगा से जोड़कर आमदनी दोगुनी करने की मुहिम को तेज करने की पहल हो रही है। जिले के लिए करीब 2200 करोड़ की योजना मनरेगा से तैयार की गई है जिसमें 1387 करोड़ का बजट श्रमिकों पर ही खर्च किए जाने को प्रस्तावित किया गया है।
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इससे 68 लाख मानव दिवस सृजित होंगे। 1214 पंचायतों के करीब डेढ़ लाख श्रमिकों को उनके गांव में ही रोजगार देने की पहल हो रही है। ग्राम्य विकास विभाग को जिले के लिए बजट का प्रस्ताव भेजा गया है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने की पूरी उम्मीद है और इससे जिले में कई अहम परियोजनाओं में तेजी आएगी।
जिले के 16 ब्लॉकों और 1214 पंचायतों के विकास कार्यों के लिए मनरेगा की भूमिका अहम है। साल 2021-22 में मनरेगा को जोड़कर कई महत्वपूर्ण कार्य कराए गये हैं। अब नये वित्तीय साल 2022-23 में मनरेगा से गांवों के विकास के साथ ही किसानों की तरक्की के लिए अहम पहल की जा रही है। इसमें बड़े स्तर पर कृषि से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
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गरीब किसानों के खेतों का समतलीकरण कराने के साथ ही उनको कृषि से जुड़ी परियोजनाओं से जोड़ा जाना है। यही नहीं हर पंचायत में गरीब किसानों का चयन होगा और उनको अपने ही खेतों में कार्य करने पर मजदूरी का भुगतान भी होगा। इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलना तय है। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए भी मनरेगा अब वरदान साबित होगी, इससे चरनी की सौगात देने के साथ ही उन्हें भी मजदूरी का भुगतान मिलेगा। इसके अलावा गोआश्रय केंद्रों की सूरत बदलने में मनरेगा अहम भूमिका निभाएगी। इस तरह पूरे साल 2200 करोड़ से अधिक का बजट खर्च किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
मनरेगा से आने वाले साल में पंचायतों की सूरत बदलने के साथ ही जीवनदायिनी नदियों के जीर्णोद्धार की योजनाएं भी संचालित होंगी जिससे जिले के दो लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। नदियों के आसपास की पंचायतों में तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ ही नदियों और रिक्त पड़ी जमीनों पर पौधरोपण भी कराने में मनरेगा का उपयोग होगा। मनरेगा अब सिर्फ सड़क निर्माण तक ही सीमित नहीं रहेगी, इससे पंचायतों के अन्य कार्य भी हो सकेंगे। बस परियोजनाएं ऐसी बनेंगी जिससे श्रम व सामग्री के अनुपात का उल्लंघन न हो।
गांव के गरीबों को मनरेगा से जोड़े जाने की तैयारी है। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के लाभार्थियों को मजदूरी दिए जाने की व्यवस्था है। लाभार्थी आवास योजना से तय धनराशि आवास निर्माण के लिए पाएंगे। इसके साथ ही उन्हें अपना ही घर बनाने के लिए 90 दिनों की मजदूरी मिलेगी। इससे प्रत्येक आवास लाभार्थी को 18360 रुपये की मजदूरी मनरेगा से दी जाएगी। इसके लिए उन्हें अपने आवास के निर्माण में काम करना है। इसके अलावा उनकी भूमि को सुधार की योजना से भी जोड़ा जा सकेगा।
मनरेगा से श्रमिकों को रोजगार देने के लिए बजट तैयार किया गया है। इसमें कृषि कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसानों की आय बढ़ सके। शासन से बजट स्वीकृत होने पर योजनाएं लागू की जाएंगी।
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-शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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