गोंडा। कस्तूूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में 12 सालों से कार्य कर रहे 64 पार्ट टाइम शिक्षकों की नौकरी पर खतरा बढ़ गया है। विभाग को 12 साल बाद वे नियम याद आए जो भर्ती के समय लागू ही नहीं किए गए थे। अचानक से महानिदेशक स्कूली शिक्षा के आदेश कोरोना संकट में ही कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में छटनी की कार्रवाई शुरू हुई है।
20 अगस्त तक कार्रवाई पूरी होनी थी, लेकिन बीएसए के कोरोना पॉजिटिव हो जाने के कारण पत्रावली अभी अफसरों के बीच में ही दौड़ रही है। माना जा रहा है कि पार्ट टाइम शिक्षकों के समायोजन का रास्ता नहीं निकलने से उनके नवीनीकरण पर संकट है। फिलहाल कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों के शिक्षकों ने मांग किया है कि उन्हें ऐसे ही सेवा से न हटाया जाए।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों का संचालन 15 सालों से जिले में हो रहा है। शुरूआती समय में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों का संचालन नवोदय स्कूलों की तर्ज शुरू हुआ था और 100 छात्राओं के प्रवेश की सीमा तय करके उन्हें आवासीय सुविधा से शिक्षा देने की पहल हुई थी। इन स्कूलों में 100 से अधिक को प्रवेश नहीं मिल सकता है। जिले में 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों का संचालन हो रहा है, पूर्व में तय पदों के आधार पर चयन की कार्रवाई हुई। अब महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने इन स्कूलों के संचालन की व्यवस्था न सिर्फ बदलाव किया, बल्कि पदों की तुलना बेसिक शिक्षा के उच्च प्राथमिक स्कूलों से कर दिया है। ऐसे में फुलटाइम के पांच शिक्षकों व 64 पार्ट टाइम शिक्षक पद से अधिक नियुक्त मिले हैं।
समायोजन की व्यवस्था देने से 5 फुलटाइम शिक्षिकाओं की नौकरी सुरक्षित होने का रास्ता निकल आया है और उन्हें दूसरे कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में समायोजित किए जाने को प्रस्तावित किया गया है। इस पर जिला समिति की सहमति भी मानी जा रही है। लेकिन 64 पार्ट टाइम शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। इसमें अधिकतर पुरुष शिक्षक शामिल हैं, कई शिक्षिकाएं भी हैं जो नवीनीकरण के वंचित रह जाएंगी।
कर्मियों की कमी का स्कूल के संचालन पर दिखेगा असर
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों के 64 शिक्षकों को हटाए जाने से स्कूल संचालन पर भी असर दिखेगा। बताया जा रहा है कि अधिकतर ऐसे शिक्षक हटाए जाने की सूची में जो मुख्य विषयों के पार्ट टाइम हैं। गणित, गृहविज्ञान, विज्ञान आदि विषयों के शिक्षक भी हट रहे हैं। अब विभाग इन पदों के लिए फुलटाइम शिक्षक होने की स्थिति को मान कर इनके नवीनीकरण की कार्रवाई नहीं कर रहा है। पार्ट टाइम को फुलटाइम शिक्षक बनाए जाने में नियमों का पेंच है। ऐसे में आने वाले दिनों में पढ़ाई पर असर पड़ना तय है।
शिक्षकों की सेवाओं के लिए विकल्पों पर विचार नहीं
पहली बार कोरोना संकट के इस दौर में बड़ी संख्या में कर्मियों को किसी विभाग में हटाया जा रहा है। वह भी उन शिक्षकों को जो 12 साल से सेवाएं दे रहे थे। उनके लिए विकल्प भी सीमित हैं। सेवाओं की सुरक्षा के लिए कोई बेहतर विकल्प नहीं है। एक शिक्षक का कहना है कि रिक्त पदों पर समायोजन का अवसर सबको दिया जाना चाहिए था। ऐसा नही हो रहा है। जिससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे। वैसे शिक्षकों ने कई स्तर पर अपनी मांग पहुंचाई है।
कस्तूरबा स्कूलों के कर्मचारियों के बारे में शासन से मिले निर्देशों के तहत कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट तैयार है और समिति को पत्रावली भेजी जा चुकी है। जल्द ही पात्र कर्मियों के नवीनीकरण की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए