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सरयू ने निगल ली 20 एकड़ कृषि योग्य जमीन

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करनैलगंज/नवाबगंज (गोंडा)। सरयू का जलस्तर स्थित हो गया है। लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदी अब घटने लगी है। घटते समय नदी में उठ रहे मशीना के कारण जमीनें कट कर नदी में समाहित हो रही हैं। नदी किसानों की 20 एकड़ जमीन निगल चुकी है। ग्राम बांसगांव के पास बांध भी नदी की कटान की जद में आ गया है। हालांकि बाढ़ का पानी लगातार बांध से टकरा रहा है। रविवार को सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर रहा। वहीं नवाबगंज इलाके में एक दर्जन गांवों के बाढ़ से घिरे होने के कारण किसानों व पशु पालकों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है।
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माझा क्षेत्र नदी का पानी घटने के बावजूद बाढ़ की स्थिति बरकरार रहने के कारण तमाम माझा निवासी अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान पर निकल गए हैं। बाढ़ से प्रभावित तुलसीपुर माझा, दत्तनगर, गोकुला, साकीपुर, चौखड़िया, जैतपुर, माझाराठ, दुल्लापुर, दुर्गागंज, महेशपुर, सहित दर्जनों से अधिक गांवों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है। माझा क्षेत्र के निवासियों का प्रमुख उद्योग पशुपालन है जो कि इस समय पानी भरा होने के कारण चौपट होती नजर आ रही है।
माझा वासियों के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या उनके मवेशियों के लिए चारे को लेकर उत्पन्न हो गई है। अपने मवेशियों के चारे के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की महिलाएं व बच्चे मैदानी इलाकों में जा कर चारे की व्यवस्था कर शाम होने से पहले अपने घर पर वापस आ जाते हैं। दैनिक उपयोग की वस्तुओं को लाने के लिए नदी में चलकर तैरकर व नाव से बाजार जाना पड़ता है। प्रशासन के लोगों के पास उनके लिए उचित नाव की व्यवस्था अभी नहीं हो पाई है। प्रशासन के लोग सिर्फ बाढ़ चौकी पर बैठ कर अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। माझा वासियों की दुश्वारियां अभी जस की तस बरकरार हैं।
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माझा वासियों का कहना है कि प्रशासन हमारे लिए अभी तक न कुछ कर पाया है और न ही अब कोई उम्मीद नजर आ रही है। इस समस्या से हम बुरी तरह जूझ रहे हैं। क्षेत्र में सरयू नदी के समानांतर एक और नदी टेढ़ी नदी बह रही है। जोकि बहराइच के चित्तौड़ा ताल से निकलकर अयोध्या में सरयू नदी में समाहित होती है। टेढ़ी नदी भी इस समय अपने पूरे शबाब पर है। टेढ़ी नदी से प्रभावित गांवों जैतपुर, दुल्लापुर, दुर्गागंज, माझाराठ, सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है। क्षेत्र में सरयू तथा टेढ़ी नदी के बीच स्थित गांवों के लोग सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन के लोग अभी बाढ़ की स्थिति और विकराल होने का इंतजार कर रहे हैं।
घर और मकान छोड़कर बंधे पर रहने को मजबूर हैं लोग
बाढ़ से प्रभावित लोग अपना घर और आशियाना छोड़कर कहीं बांध पर तो कहीं सुरक्षित स्थानों पर डेरा जमाए हैं। जिन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली निशुल्क दवाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं और दर्जनों बीमार बाढ़ पीड़ित झोलाछाप डॉक्टरों से अपना इलाज करा रहे हैं। गोंडा एवं बाराबंकी जिले की सीमा पर बसे 4 गांवों एवं गोंडा जिले की ग्राम नकहरा में घाघरा का पानी घटने के बाद फिर से एक बार गांव हो या घर जलमग्न हो चुके हैं। बीमारियों की जैसे बाढ़ आ गई है।
बाढ़ से अत्यंत प्रभावित ग्राम कमियार, माझा रायपुर, परसावल एवं नैपुरा की आबादी देखा जाए तो करीब 10 हजार है और ये गांव अभी भी पानी से पूरी तरह जलमग्न है। यहां के ग्रामीण बांध एवं सुरक्षित स्थानों पर अपना आशियाना बनाया करने लगे हैं। उन्हें सरकार की तरफ से राशन और पॉलीथिन छाजन के लिए दी गई है। गांव के निवासी बाबूलाल, प्रदीप कुमार, रामनिवास, पुत्ती लाल, स्वामीनाथ, बड़के, समोखन आदि का कहना है कि पूरे बाढ़ के कार्यकाल में उनके गांव तक मात्र लेखपाल ही आता है। बाकी कोई अधिकारी उनका हाल जानने के लिए नहीं आता। कोटेदारों के माध्यम से उन्हें अनाज मिल रहा है।
घाघरा में आई बाढ़ से फसलें बर्बाद
ग्राम रायपुर माझा गांव के निवासी रामनिवास, पुत्ती लाल, स्वामीनाथ बताते हैं कि अधिकारी बाढ़ आने का इंतजार करते हैं और हम बाढ़ जाने का इंतजार करते हैं। सारी फसलें घाघरा में आई बाढ़ से बर्बाद हो गईं। उनकी जमीनों नदी में कट गई। उनकी नाव को गांव में लगाया गया। मगर 3 साल से जब से नई सरकार आई है तब से उन्हें ना तो फसल का नुकसान का मुआवजा मिला न ही उन्हें जमीन कटने का मुआवजा मिला है। यहां तक की जिन लोगों ने अपनी नाव बाढ़ में लगाइ और प्रशासन ने उन्हें किराया देने का आश्वासन दिया उन लोगों को नाव का किराया तक नहीं मिला।
डीएम ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के दिए निर्देश
गोंडा। जिले की तहसील करनैलगंज अंतर्गत ग्राम नकहरा के कई मजरे तथा तहसील तरबगंज अंतर्गत ऐली-परसौली के मजरा विशुनपुरवा मजरा प्रभावित हुए हैं। दोनों तहसीलों के 1244 बाढ़ प्रभावितों को जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल के निर्देश पर राशन किट वितरित की गई है तथा मवेशियों के लिए 35 क्विंटल भूसे का वितरण कराने के साथ ही मेडिकल टीम द्वारा काउंटर लगाकर दवा का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि जनपद में इस वर्ष 17 जून से अब तक लगभग 1742 मिली लीटर वर्षा हुई है। इस वर्ष अतिवृष्टि के कारण करनैलगंज व तरबगंज में 1542 हेक्टेयर क्षेत्रफल वर्षा के कारण प्रभावित हुआ है जिसमें 1085 हेक्टेयर क्षेेत्रफल की फसल भी प्रभावित हुई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 23 बाढ़ चाौकियां सक्रिय हैं तथा 02 राहत वितरण केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। आवागमन के लिए 194 नावों का उपयोग किया जा रहा है। 01 प्लाटून पीएसी की फ्लड बटालियन भी तहसील तरबगंज में तैनात है। मेडिकल रिस्पांस के लिए मेडिकल की 19 टीमें गठित हैं तथा अब तक 2434 लोगों का उपचार मेडिकल टीम द्वारा किया जा चुका है तथा 40,385 लोगों को क्लोरीन की टैबलेट तथा 2607 लोगों को ओआरएस का पैकेट दिया जा चुका है तथा 1432 लोगों को लंच पैकेट प्रदान किया गया है। जिलाधिकारी ने राजस्व, बाढ़ खंड तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार आवश्यक राहत कार्य सुचारू रूप से कराए जाने के लिए निर्देशित किया।
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