गोंडा। सामुदायिक मध्यस्थता से देवीपाटन मंडल के 500 गांव वादमुक्त बनेंगे। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने इसके लिए मंडल के सभी जिलों को 125-125 गांवों का लक्ष्य सौंपा है। जिला स्तरीय अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।
मंडलायुक्त ने बताया कि कई बार शिकायतों का त्वरित व सम्मानजनक समाधान न होने से छोटे-छोटे विवाद भी अदालत तक पहुंच जाते हैं। मुकदमों के बोझ से दबी अदालतों को राहत देने के लिए उनके स्तर से सामुदायिक मध्यस्थता की पहल शुरू की गई है।
मंडलायुक्त ने बताया कि मध्यस्थता केंद्र कोई न्यायालय या अर्ध-न्यायिक मंच नहीं है। यह केवल संवाद और समझौते का मंच है, लेकिन मध्यस्थता अधिनियम 2023 के तहत इसे कानूनी मान्यता मिली है। यहां पारिवारिक, सीमा, रास्ता, खेत की मेड़, भूमि, संपत्ति बंटवारा व पेड़ काटने जैसे दीवानी और राजस्व प्रकृति के छोटे स्थानीय मामले सुने जाते हैं। गंभीर आपराधिक मामले इसमें शामिल नहीं होते। यह एक स्वैच्छिक व गैर न्यायिक प्रक्रिया है। इसमें प्रशिक्षित स्थानीय मध्यस्थ दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति के बिना कोई समाधान नहीं कराते हैं।
ये होते हैं पैनल के सदस्य
स्थानीय प्रशासन पक्षकारों की सहमति से मध्यस्थता योग्य मामले चिह्नित कर ग्राम पंचायत स्तर पर पैनल गठित करता है। पांच सदस्यीय मध्यस्थ पैनल में लेखपाल, पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान पदेन सदस्य होते हैं। वहीं, एक महिला प्रतिनिधि और गांव के वरिष्ठ व्यक्ति को सामुदायिक सदस्य नामित किया जाता है। नियत तिथि पर बैठक पंचायत भवन या किसी सार्वजनिक स्थान पर होती है।
तहसीलदार बने नोडल अधिकारी
मंडल स्तर पर इसके पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी अपर आयुक्त (न्यायिक) राजेश कुमार यादव को सौंपी गई है। सभी जिलों की तहसीलों में इन गांवों को समान रूप से बांटकर काम शुरू कर दिया गया है। संबंधित तहसीलदारों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सोमवार से दूसरे चरण का अभियान शुरू हो गया है। पहले चरण में बलरामपुर व श्रावस्ती जिलों के 150 गांवों में 202 प्रकरण अब तक निपटाए जा चुके हैं।