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Gonda News: पशुओं के टीकाकरण के लिए गांवाें में बरसों से नहीं पहुंची सरकारी टीम

Tue, 11 Aug 2026 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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पशुओं के साथ किसान। संवाद
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गोंडा। पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान के सरकारी आंकड़े शत-प्रतिशत बताए जा रहे हैं, लेकिन गांवों में स्थिति इससे अलग है। कई पशुपालकों का कहना है कि उनके गांव में वर्षों से टीकाकरण टीम आई ही नहीं है। वहीं, विभाग लक्ष्य पूरा होने का दावा कर रहा है। इससे सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जिले में करीब 5.53 लाख पशु हैं। इनमें 2.01 लाख गाय और 3.52 लाख भैंस हैं। विभाग के अनुसार, एक जून से 15 जुलाई तक गलघोंटू से बचाव के लिए 4.88 लाख पशुओं का टीकाकरण किया गया। अब खुरपका-मुंहपका से बचाव का अभियान चल रहा है।

कहीं पांच साल से नहीं लगा टीका
तरबगंज के नरायनपुर डीहा निवासी कृष्ण कुमार शुक्ल ने बताया कि उनके पास दो गाय और तीन भैंस हैं, लेकिन पांच-छह साल से किसी पशु का टीकाकरण नहीं हुआ। गिरधरपुर खजुही के ओमप्रकाश यादव और देवता प्रसाद ने भी वर्षों से टीम के गांव नहीं पहुंचने की बात कही।
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परसपुर के सहजौरा निवासी रामकुमार ने बताया कि उनके नौ पशुओं में अब तक किसी को भी टीका नहीं लगा। रामबहोर, सोमनाथ समेत अन्य पशुपालकों ने भी ऐसी ही शिकायत की। किसी ने दो तो किसी ने पांच साल से टीकाकरण टीम गांव नहीं आने की बात कही है। डोमाकल्पी के शुक्लपुरवा निवासी खतूना ने भी अपनी गाय और बछिया के टीकाकरण से वंचित होने की बात कही।

ग्रामीणों ने नकार दिया विभाग का दावा
रामापुर पशु चिकित्सालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सर्वादीन ने छिरास, नदावा और जमथरा में करीब 500 पशुओं के टीकाकरण का दावा किया। इसके विपरीत छिरास के रानीपुरवा निवासी पप्पू शुक्ल, हीरालाल, धनलाल और शिवनारायण ने कहा कि उनके पशुओं को कोई टीका नहीं लगा। ग्राम पंचायत के प्रशासक प्रतिनिधि मोहित शुक्ल और सचिव रंजीत कुमार वर्मा ने भी टीकाकरण की जानकारी होने से इन्कार किया। इटियाथोक के अयाह गांव के लवकुश शुक्ल तथा पारासराय के आशीष पांडेय और सुनील पांडेय ने भी टीम के गांव न पहुंचने की बात कही।

12 चिकित्सकों के भरोसे 35 अस्पताल
नोडल अधिकारी डॉ. निशांत यादव ने कहा कि विभाग शत-प्रतिशत टीकाकरण करा चुका है। उनके मुताबिक, उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। जिले में करीब 35 पशु चिकित्सालय हैं, जबकि व्यवस्था 12 चिकित्सकों और कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। डिप्टी सीवीओ खिलाड़ी शंकर ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण कई जगह 100 के लक्ष्य के मुकाबले 30-40 पशुओं का ही टीकाकरण हो पाता है। पशुपालकों के सहयोग न करने से भी कुछ पशु छूट सकते हैं। सूचना मिलने पर टीम भेजकर टीकाकरण कराया जाता है।

क्षेत्र से नदारद रहने का आरोप
रुपईडीह के विशुनापुर में तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी प्राची गुप्ता के लखनऊ में रहने का आरोप लगाया गया है। पैरावेट अतुल कुमार सिंह, प्रदीप कुमार, देवांक मिश्र, रामपूजन, इंद्रसेन शुक्ल और पंकज शर्मा ने बताया कि वे टीम लीडर के निर्देश पर टीकाकरण करते हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी प्राची गुप्ता ने कहा कि वह क्षेत्र में ही रहकर टीकाकरण का काम करती हैं।

प्रधानों को भी नहीं मिलती सूचना
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष उमापति त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि विभाग ग्राम प्रधानों को टीकाकरण की सूचना तक नहीं देता। कई पंचायतों में वर्षों से टीकाकरण नहीं हुआ है। उन्होंने अभियान की नियमित निगरानी कराने और छूटे हुए पशुओं का तत्काल टीकाकरण कराने की मांग की।
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एक नजर में
जिले में 16 ब्लॉक व 1192 ग्राम पंचायतों में कुल 5.53 लाख पशु हैं।
टीकाकरण के 45 दिन के अभियान में 48 टीमें लगाई गई हैं।
प्रत्येक टीम को 10,166 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है।
कुल 4.88 लाख पशुओं को गलघोंटू का टीका लगना है
(विभाग से मिली जानकारी के आधार पर आंकड़े)

पशुओं के साथ किसान। संवाद

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