सिटी मजिस्ट्रेट एके शुक्ल ने गुरुवार को नगर पालिका परिषद कार्यालय का औचक निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों के कार्य में लापरवाही मिली। इस पर मौके पर ही ठेला लिपिक समेत 43 चपरासियों का वेतन रोक दिय गया। दो स्थानों पर नजूल की जमीन पर अतिक्रमण पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया।
गुरुवार को एक बजे नगर पालिका परिषद कार्यालय के औचक निरीक्षण पर आए सिटी मजिस्ट्रेट को अधिशासी अधिकारी कक्ष में बाबू व चपरासी नदारद मिले। घंटी बजाने पर भी एक चपरासी नहीं आया, जबकि यहां 43 चपरासी तैनात हैं।
इस पर कार्यालय सहायक से उपस्थित रजिस्टर व टूर रजिस्टर मांगा गया तो टूर रजिस्टर नहीं मिला। टूर रजिस्टर बनाने की हिदायत के साथ सभी का वेतन अग्र्रिम आदेश तक रोक दिया गया। मौके पर आए चार चपरासी काम पूछने पर जवाब नहीं दे पाए।
इस पर ड्यूूटी रजिस्टर बनाने का आदेश कार्यालय सहायक को दिया गया। साथ ही हिदायत दी कि चपरासी परिचय पत्र के साथ ड्यूटी पर आएं, जिससे उनकी पहचान अलग रहे। कंप्यूटर बाबू को बताया गया कि नेट सही कराने गया है।
उधर, शहर में दो स्थानों पर नजूल की जमीन पर अवैध निर्माण की शिकायत सही पाये जाने पर अतिक्रमण करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया। इनमें इमामबाड़ा के मेंहदी स्कूल के पास आरिफ व रजी पर निर्माण का आरोप है।
मौके पर निर्माण ढहाने के लिए कहा गया। दूसरा मामला राधाकुंड गांधी विद्या मंदिर के पास में हरी लाल का है जो अवैध निर्माण करा रहे थे। मौके पर टीम भेजकर निर्माण रोका गया और ध्वस्तीकरण के लिए आरोपी को आदेश दिया गया।
निरीक्षण में खसरा रजिस्टर नहीं मिला, जिस पर कार्यालय सहायक को खसरा रजिस्टर तैयार कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि नजूल की जमीन पर कहां पर मंदिर, मस्जिद, पेड़, तालाब पर अवैध कब्जा है। इसका सर्वे हर साल होना चाहिए, जिससे नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा रोका जा सके।