रुपईडीह (गोंडा)। योगा के साथ आयुर्वेद का प्रसार तो केंद्र व राज्य सरकार जोरों पर कर रही है, लेकिन जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में जहां चिकित्सकों की कमी है वहीं भवन भी नहीं हैं। लोगों को आयुर्वेदिक दवाओं से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी से लोगों की उम्मीदें पूरी नहीं हो पा रही हैं। जिले में 42 आयुर्वेदिक अस्पताल खुले हैं, लेकिन चिकित्सक सिर्फ 11 में ही हैं। इसी तरह भवन तो महज 5 अस्पतालों के पास ही है। इसके अलावा 37 आयुर्वेदिक अस्पताल या तो किराए पर हैं या फिर उधार पर चल रहे हैं। 35 लाख की आबादी वाले जनपद में 42 अस्पताल की स्थापना कम नहीं हैं लेकिन वहां चिकित्सकों की कमी लोगों को सता रही है।
आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग की ओर एक बार फिर लोग लौट रहे हैं। सरकार की ओर से तो पड़ोसी जनपद बाराबंकी में आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की स्थापना कराई जा रही है, इससे लोगों में उम्मीद जगी है कि जिले की आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर बनेंगी। आयुर्वेदिक अस्पतालों के हाल पर जानकारी की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 42 अस्पतालों में 31 अस्पताल बिना चिकित्सक के ही चल रहे हैं। वहां फार्मासिस्ट के भरोसे ही इलाज हो रहा है। इससे लोगों की समुचित इलाज नहीं मिल रहा है और अस्पताल सिर्फ खानापूर्ति के लिए बन कर रह गए हैं।
यहां तक की 20 से अधिक अस्पतालों में तो चौकीदार व अन्य कर्मचारी ही नहीं हैं। ऐसे में चिकित्सक या फार्मासिस्टों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। धोबहा राय के प्रधान प्रतिनिध संतोष सिंह उर्फ पप्पू सिंह कहते हैं कि आयुर्वेदिक अस्पतालों की दशा बहुत ही खराब है, सरकार से उम्मीद है कि सुधार होगा। रुपईडीह ब्लॉक के प्रधान संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार मिश्र, प्रधान मैनुद्दीन खां, मोहम्मद अहमद, बृजभूषण ओझा, कृष्ण कुमार चतुर्वेदी आदि ने भी आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल को जीवन रक्षा के लिए जरूरी बताया। कहा कि आयुर्वेद से स्थाई निदान रोगों का संभव है। अस्पतालों में डॉक्टर व अन्य कर्मियों की कमी दूर हो।
इन अस्पतालों में ही है चिकित्सकों की तैनाती
42 आयुर्वेदिक अस्पतालों में चार यूनानी चिकित्सालय भी हैं। गौरा चौकी के यूनानी अस्पताल में चिकित्सक डॉ. अब्दुल बारी की तैनाती है। इसके अलावा मनकापुर, नगर गोंडा के अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं। आयुर्वेदिक अस्पतालों में साबरपुर में डॉ. इन्द्रजीत, नगरा बुजुर्ग में डॉ. हरिश्चन्द्र चौधरी, कटरा शिवदयालगंज में डॉ. महेन्द्र सिंह विष्णु, बाबागंज में डॉ. शिवाजी सिंह, कटरा बाजार में डॉ. ज्ञान प्रकाश पांडे, नगर गोंडा में डॉ. शिवप्रताप वर्मा, करनैलगंज में डॉ. राज कुमार वर्मा, चकरौत में डॉ. प्रियंका पटेल, पाल्हापुर चचरी में डॉ. अनिल तथा दर्जीकुआं आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉ. प्रदीप शुक्ल की तैनाती है। इसके अलावा 31 अस्पतालों में चिकित्सक ही नहीं हैं। इसके अलावा मंगुरा बाजार, नगरा बुजुर्ग, बनगाई, उमरी बेगमगंज व पकड़ी में ही भवन है। 37 अस्पताल दूसरे भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
शासन को भेजी गई रिपोर्ट
चिकित्सकों और भवनों की कमी के बारे में रिपोर्ट भेजी गई है। निदेशालय को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है और चिकित्सकों के तैनाती की मांग किया गया है। आयुर्वेदिक अस्पतालों को संचालित रखने के लिए हर संभव प्रयास हो रहा है। फार्मासिस्ट सभी अस्पतालों में हैं। -डॉ. अशोक कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी