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Gonda News: बाढ़ से 40 गांव घिरे, 100 बीघे जमीन व तीन पक्के मकान नदी में समाए

Thu, 19 Sep 2024 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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नवाबगंज के दत्तनगर गांव में घुसा बाढ़ का पानी। 
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उमरीबेगमगंज/करनैलगंज/विश्नोहरपुर (गोंडा)। सरयू नदी के पानी का फैलाव तेजी से गांवों में हो रहा है। इससे 40 गांव बाढ़ से घिरे हैं। गांवों में पानी का फैलाव होने से नदी का जलस्तर तो घट रहा है, लेकिन खेतों में कटान तेजी से हो रहा है। करनैलगंज तहसील के तटवर्ती गांवों में करीब सौ बीघे जमीन कटकर नदी में समा गई। वहीं तरबगंज तहसील के ऐली परसौली बिहारीपुरवा में तीन पक्के मकान कटकर नदी में समा गए। प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले 82 परिषदीय स्कूलों को चिन्हित किया है। जिन्हें दूसरे स्कूलों में संचालित करने की तैयारी की है।
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बुधवार की शाम तक सरयू नदी घटते हुए खतरे के निशान से मात्र 23 सेंटीमीटर ऊपर रह गई। बाढ़ प्रभावित गांवों का पानी अब धीरे-धीरे निकलने लगा है, लेकिन जलस्तर घटने के साथ ही खेतों में कटान हो रही है, इससे माझावासियों की धकड़ने तेज हैं। करनैलगंज के माझा रायपुर गांव में जल भराव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्राम नकहरा के नौ गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। बहुवन मदार माझा गांव के करीब तीन दर्जन किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि जिस पर गन्ना, धान, मक्का और हरी सब्जी की लगी थी, वह पूरी तरह चौपट हो चुकी है। अधिकांश खेत कटकर नदी में समाहित हो चुके हैं। तरबगंज तहसील के ऐली परसौली के बिहारी पुरवा में काटन की जद में आकर तीन लोगों लहरी यादव, दयाराम व मंसाराम का पक्का मकान नदी में समा गया। बाढ़ के सैलाब में धान की फसलों के साथ मवेशियों का चारा भी पूरी तरह से नष्ट हो गया। अभी भी बाढ़ पीड़ित बांध पर या फिर पड़ोसी गांव में डेरा डालकर अपनी मवेशियों के साथ गुजर बसर कर रहे हैं।
आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने बाढ़ प्रभावित जबर नगर व गढ़ी क्षेत्रों का मंगलवार की देरशाम निरीक्षण किया। पीड़ितों का हाल जाना और अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। ऐली की 80 साल की बुजुर्ग महिला जुगरा ने बताया कि भैया सब कुछ बहगवा, कुछ राहत आउर मिलत तौ बरखा पार होय जात। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित ब्यौंदा माझा, दत्तनगर, साकीपुर, माझाराठ, जैतपुर के गांवों में पानी ही पानी है। गांवों के संपर्क मार्ग पानी में डूबे हुए हैं। सबसे बड़ी समस्या लोगों के आवागमन की है, तीन दिनों के अवकाश के बाद बुधवार को स्कूल खुलने के बाद भी छात्र छात्राएं अपने घरों से नहीं निकलीं। कुछ स्कूलों तक तो यहां तैनात शिक्षक भी जलभराव के चलते नहीं पहुंच पाए। बलुहा पुल, गोकुला चौराहा, मरी माता के मंदिर के पास और राजाराम चौराहे के निकट बाढ़ पीडितों का डेरा है। एसडीएम विशाल कुमार ने बताया की पीड़ितों को राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश कुमार और नायब तहसीलदार चंदन कुमार ने केंद्रों पर पहुंचकर पीड़ितों का हाल जाना।
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खेतों को काटते हुए तटबंधों से टकरा रही नदी, संकट बढ़ा
करनैलगंज (गोंडा)। घटते हुए सरयू के जलस्तर से खेतों में कटान कर नदी एल्गिन चरसड़ी तटबंध और भिखारीपुर सकरौर से टकरा रही है। कटान की आशंका बढ़ गई है, बाढ़ खंड के अधिकारी बांध के बचाव में जुटे हैं। ग्राम बहुवन मदार माझा के पास जहां सबसे अधिक संवेदनशील स्थिति बनी हुई थी, वहां बांध को बचाने के बंदोबस्त किए गए हैं। मगर जहां बांध को बचाने के लिए कटान रोकने की व्यवस्था की गई है, उस स्थान से 500 मीटर अगल-बगल दोनों तरफ नदी तेजी से कटान करती हुई बांध की तरफ बढ़ रही है। बांध और नदी के बीच खाली पड़ी जमीन पर जल भराव के चलते जमीन दलदल हो चुकी है। बांध की सुरक्षा के लिए लगाए गए बंबूक्रेट और बांस-बल्ली में पत्थर, बालू भरी बोरियां नदी में डाली गई थी वे भी नदी में समाहित होती जा रही हैं। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि मामूली कटान हुआ है, कटान को रोकने की व्यवस्था की गई है। तहसीलदार मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
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