घाघरा एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर गई है। तेजी से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं मशीना उठने से एल्गिन-चरसडी बांध का करीब दस मीटर लम्बाई में छह मीटर चौड़े बांध का तीन मीटर हिस्सा बांध कट कर नदी में समा गया। बांध में तेजी से कटान जारी है। कटान के आगे बांध का बचाव कार्य फेल होता नजर आ रहा है। बस एक और मशीना उठने पर पूरा बांध कभी भी घाघरा की जद में आ सकता है।
शुक्रवार को सुबह से ही घाघरा में तेजी से पानी बढ़ने लगा। दोपहर तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब चार इंच ऊपर हो गया। लगातार जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है। एल्गिन-चरसड़ी बांध के अति संवेदनशील हिस्से में सुबह से धीमी गति से कटान हो रही थी, मगर दोपहर में घाघरा की धारा में उठा तेज मशीना (पानी में उठने वाला बवंडर) बांध तक पहुंच गया। स्पर नम्बर तीन के शेष बचे करीब तीन मीटर हिस्से को काटते हुए मशीना सीधे बांध को काटने लगा। ग्राम रायपुर-नकहरा के सामने करीब दस मीटर लम्बाई में बांध का तीन मीटर हिस्सा नदी में समा गया।
शुक्रवार को घाघरा में बरसात के पानी के साथ ही विभिन्न बैराजों का पानी आ गया। जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऊधर पानी का डिस्चार्ज दोपहर तक सही रहा। करीब एक लाख 65 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ मगर दोपहर बाद डिस्चार्ज में भी भारी गिरावट आ गई। बताया जाता है कि गिरजा व शारदा बैराज का पानी भी घाघरा में आया है जिसका माप नहीं बताया गया। बांध पर एक तरफ कटान तो दूसरी ओर बांध की मरम्मत चल रही है। मगर बांध को सबसे बड़ा खतरा मशीना से हो गया है। जो पानी बढ़ते व घटते समय ही उठता है। बांध का मरम्मत कार्य भी इतनी धीमी गति से हो रहा है कि बांध में एक बार तेज हुई कटान को रोक पाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो सकता है। बांध पर मौजूद एई अशोक कुमार बताते हैं कि घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है तथा मशीना उठने से बांध को नुकसान हुआ है, जिसकी मरम्मत कराई जा रही है।