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Gonda News: 289 लोगों ने तंबाकू छोड़ बदली जिंदगी, लौटीं खुशियां

Sat, 30 May 2026 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। तंबाकू की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक संबंधों और आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करती है। जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे तंबाकू नियंत्रण और परामर्श कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
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अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक जिले के विभिन्न एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) क्लीनिक में 3250 लोगों की काउंसलिंग की गई, जिनमें से 289 लोगों ने तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया।
जिले के मेडिकल कॉलेज, वजीरगंज, पंडरीकृपाल, नवाबगंज और तरबगंज स्थित एनसीडी क्लीनिक में तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को नियमित परामर्श दिया जा रहा है। यहां प्रशिक्षित काउंसलर लोगों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करते हैं और लत छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं।
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काउंसलर सरिता तिवारी ने बताया कि तंबाकू की लत छोड़ना कठिन अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति होती है और जो नियमित रूप से परामर्श लेते हैं, उनके सफल होने की संभावना अधिक रहती है।

केस एक - तंबाकू छोड़ते ही फिर बसा परिवार
शहर के एक वार्ड की रहने वाली सुनीता लंबे समय से तंबाकू खाने की आदी थीं। पति रामू कई बार उन्हें समझाते रहे, लेकिन जब कोई बदलाव नहीं हुआ तो उन्होंने सुनीता को मायके छोड़ दिया। पति ने साफ कहा था कि जब तक वह तंबाकू नहीं छोड़ेंगी, तब तक उन्हें वापस नहीं लाया जाएगा। मार्च माह में सुनीता ने मेडिकल कॉलेज स्थित एनसीडी क्लीनिक में संपर्क किया। यहां उन्हें नियमित काउंसलिंग दी गई। चार बार परामर्श लेने के बाद उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया। पति ने सुनीता को वापस अपने साथ रख लिया।

नशे से दूरी बनी रिश्ते बचाने की वजह
तरबगंज क्षेत्र की रहने वाली रंजना तंबाकू और शराब दोनों की लत से ग्रसित थीं। नशे के कारण पति बालकराम सोनकर से अक्सर विवाद होता था। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि मामला तलाक तक पहुंच गया था। परिवार टूटने की कगार पर था। अप्रैल माह में रंजना ने एनसीडी क्लीनिक में संपर्क किया। नियमित काउंसलिंग, परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे तंबाकू और शराब दोनों का सेवन छोड़ दिया। इसके बाद पति-पत्नी के संबंधों में सुधार हुआ और दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया।

युवाओं में बढ़ रही चिंता
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार युवाओं में गुटखा, खैनी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। कम उम्र में शुरू होने वाली यह आदत बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जागरूकता और परामर्श उपलब्ध कराया जाए तो बड़ी संख्या में युवाओं को इस लत से बचाया जा सकता है।
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ऐसे छोड़ी जा सकती है तंबाकू की लत
तंबाकू छोड़ने के लिए एक निश्चित तारीख तय करें।
सेवन की मात्रा धीरे-धीरे कम करें।
तंबाकू लेने की इच्छा बढ़ाने वाली परिस्थितियों से बचें।
डॉक्टर की सलाह पर निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी का उपयोग करें।
सौंफ, इलायची या शुगर-फ्री च्यूइंग गम का सहारा लें।
भरपूर मात्रा में पानी पिएं।
योग, प्राणायाम और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
परिवार और मित्रों का सहयोग लें।
तनाव से बचने के लिए सकारात्मक गतिविधियों में शामिल हों।
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