गोंडा। अभिभावक जिस भरोसे के साथ अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, उसी भरोसे पर स्कूल संचालकों की लापरवाही भारी पड़ रही है। शासन के निर्देश पर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शपथपत्र देना अनिवार्य किया गया था, लेकिन जिले के 510 स्कूलों में से केवल 228 स्कूलों ने ही शपथपत्र जमा किया है। शेष 282 स्कूल अब तक निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर सके हैं।
पड़ताल के दौरान स्कूल बसों की हकीकत भी चौंकाने वाली सामने आई। शहर के पंतनगर में एक स्कूली बस की पड़ताल में न तो जीपीएस ट्रैकर मिला और न ही सीसीटीवी कैमरा लगा था। बस में फर्स्ट एड बॉक्स तो मौजूद था, लेकिन उसमें जरूरी दवाएं तक नहीं थीं। इतना ही नहीं, वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र भी पांच दिसंबर को ही समाप्त हो चुका था। इसी तरह बड़ी संख्या में स्कूल इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं।
शपथपत्र में देनी होगी यह जानकारी
- वाहन का पंजीकरण नंबर व प्रकार (बस/वैन)।
- वाहन की आयु, मॉडल, इंजन व चेसिस नंबर।
- वाहन स्वामी का नाम, पता, मोबाइल व ई मेल आईडी।
- परमिट, फिटनेस, बीमा व प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता
- जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस व सीसीटीवी कैमरे की उपलब्धता
- चालक का नाम, पता व ड्राइविंग लाइसेंस विवरण
- कम से कम पांच वर्ष का अनुभव
- पुलिस सत्यापन व स्वास्थ्य/ नेत्र परीक्षण प्रमाणपत्र
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
- बीते शैक्षिक सत्र में छपिया ब्लॉक के गोसाईंगंज मोड़ पर एक स्कूल बस से छात्रा गिरकर चोटिल हो गई थी। यह घटना एक निजी स्कूल के बस की थी। स्कूल बस बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। अचानक बस का गेट खुल गया। इससे एक छात्रा सड़क पर गिर गई थी। इलाज के बाद छात्रा स्वस्थ हुई थी।
सवाल तो वाजिब है
-क्या आप स्कूल से बस की फिटनेस रिपोर्ट नहीं मांग सकते?
-कॉपी-किताबें स्कूलों से ही तो बस या वैन बाहरी क्यों?
-स्कूल व बाहरी वैन की दर में इतना अंतर क्यों?
-क्या इनमें स्कूलों के कमीशन का खेल है?
-आखिर बसों का किराया कौन तय करता है?
-बच्चों को ई रिक्शे से क्यों स्कूल भेजते हैं?
-एलपीजी से चलने वाली वैन में बच्चों को क्यों बैठाते हैं?
स्कूलों को भेजा गया नोटिस
- सभी स्कूल संचालकों को पोर्टल पर डाटा फीड करने का निर्देश दिया गया है। जिनका फिटनेस खत्म है, उन्हें नोटिस दिया गया है। प्रतिदिन अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच की जा रही है।
आरसी भारतीय, एआरटीओ