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Gonda News: कटान से नदी में समा गए 250 बीघा खेत

Fri, 05 Sep 2025 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा में उमरीबेगमगंज के ऐली माझा में बाढ़ के पानी से ​घिरे घर से निकलता ग्रामीण। स्रोत: ग्रामी
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करनलैगंज/विश्नोहरपुर/उमरीबेगमगंज। सरयू नदी का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। नदी का पानी गांवों से उतर नहीं रहा है। कटान ने भी किसानों के सामने परेशानी खड़ी कर दी है। एल्गिन ब्रिज पर शुक्रवार सुबह नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जो दोपहर बाद घटकर 37 सेंटीमीटर पर आ गई। नदी में डिस्चार्ज भी कम हो गया है, लेकिन जलस्तर में गिरावट से कटान तेज होने का खतरा बढ़ गया है।
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एल्गिन चरसड़ी बांध व नदी के बीच स्थित किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार नदी में समा रही है। नकहरा से चंदापुर किटौली तक लगभग 14 किमी लंबाई और एक किमी चौड़ाई तक कटान हो चुका है। शुक्रवार को कटान तेज होने से बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, घरकुइयां आदि गांवों की करीब 250 बीघा भूमि नदी में समा गई।
करनैलगंज के नकहरा, चंदापुर किटौली समेत पसका क्षेत्र के 21 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। नकहरा के सभी मजरे डूब क्षेत्र में हैं। यहां लोगों को पानी से होकर ही आवागमन करना पड़ रहा है। नाव चलने की स्थिति नहीं है। ऐसे में लोगों घर से निकल भी नहीं पा रहे हैं। एसडीएम जितेंद्र गौतम ने बताया कि प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बांटी जा रही है। राजस्व व स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं। बाढ़ कार्य खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य ने बताया कि जलस्तर और डिस्चार्ज घट रहा है। दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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नेपाल के पानी से 14 गांवों में बाढ़, लोग पलायन को मजबूर
तरबगंज तहसील के 14 गांवों में बाढ़ का पानी भरने से लोग परेशान हैं। पशुओं का चारा बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों को पलायन करना पड़ रहा है। कोई रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहा है तो कोई पड़ोसियों के सहारे गुजारा कर रहा है। पशुपालक मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर निकल गए हैं। धान की फसल डूबने से बर्बाद होने की कगार पर है।
ऐली माझा के क्षेत्र पंचायत सदस्य अमरेश यादव ने बताया कि लोगों के घरों में पानी भरने से खाना बनाने तक की दिक्कत हो रही है। ईंधन भी भीग गया है। गांव के श्यामू निषाद का कहना है कि बाढ़ ने सबके अरमानों पर पानी फेर दिया है। लेखपाल अंकित वर्मा ने बताया कि नेपाल से छोड़े गए पानी से क्षेत्र के ऐली परसौली, गढ़ी, परास, बहादुरपुर, जबर नगर, पलिया, चरौठा और साखीपुर समेत 14 गांवों की करीब 16,500 की आबादी और 2,500 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र बाढ़ की चपेट में है। धान की फसल पूरी तरह डूब गई हैं।
आपदा विशेषज्ञ व तहसीलदार ने लिया जायजा
तरबगंज के तहसीलदार आशुतोष पांडेय तथा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने शुक्रवार को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट बांटकर हालचाल जाना। अधिकारियों ने बाढ़ चौकी ऐली परसौली पहुंचकर मौके पर तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की। साथ ही जानवरों के लिए भूसा वितरण कराने का निर्देश दिया। उन्होंने हल्का लेखपाल अंकित कुमार व पंकज सैनी को तत्काल डिमांड भेजने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित परिवारों और पशुपालकों को समय से राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
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