आधुनिकीरण के दौर ने केवल लोगों के सोचने समझने का तरीका ही नहीं बदला बल्कि किसी खास कला को सीखने का तरीका भी बदल दिया। 10 साल पहले तक जहां रेलवे के लोको पायलटों को इंजन पर बैठाकर उन्हें ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती थी, वहीं अब यही काम 9 करोड़ रुपये की लागत से मंगाई गई एक मशीन कर रही है। जिसके जरिए हर साल गोंडा रेलवे से हजार से 12 सौ लोको पायलट ट्रेन संचालन का हुनर सीख अलग-अलग राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
फ्रांस की कंपनी मेसर्स कोरीसटीस के साथ हुए करार के बाद भारत के 12 रेलवे स्टेशनों पर 12 सिमुलेटर भारतीय हिस्सेदारी के तहत लगाए गए थे। जिसमें डीजल लोको का एक सिमुलेटर वर्ष 2005 में गोंडा डीजलशेड में स्थापित किया गया था। जिससे 10 वर्षों में 12 हजार लोको पायलट ट्रेन संचालन की ट्रेनिंग लेकर विभिन्न राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।