गोंडा। खराब ट्रांसफार्मरों को जल्द बदलने जाने की व्यवस्था को आसान बनाते हुए पावर कॉर्पोरेशन ने हाल ही में सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इससे गांवों के फुंके ट्रांसफार्मरों का रिप्लेसमेंट 24 घंटे से भी कम समय में हो जाएगा। इतना ही नहीं पहले जहां ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए एक बार वर्कशॉप आना पड़ता था और दूसरी बार ट्रांसफार्मर ले जाने के लिए स्टोर जाना पड़ता था। उससे भी छुटकारा मिल जाएगा। यानि जिस जगह पर खराब ट्रांसफार्मर देंगे, वहीं से दूसरा सही ट्रांसफार्मर तत्काल मिल जाएगा। ऐसे में लोगों को बिजली कटौती का दंश लंबे समय तक नहीं झेलना पड़ेगा।
बचेंगे 30 लाख रुपये- वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर रिप्लेसमेंट की सिंगल विंडो व्यवस्था लागू होने से कॉर्पोरेशन को लाखों रुपये की बचत होगी, क्योंकि पहले जो खराब ट्रांसफार्मर वर्कशॉप आते थे, उनकी कॉर्पोरेशन को दो जगह लोडिंग-अनलोडिंग करानी पड़ती थी। इसमें लाखों रुपये भाड़े पर खर्च होते थे। पहले तो गांव से ट्रांसफार्मर को वर्कशॉप तक लाया जाता था। फिर ट्रांसफार्मर की रिपेयरिंग के बाद उसे स्टोर पहुंचाया जाता था। अब वर्कशॉप से कोई भी रिपेयर्ड ट्रांसफार्मर स्टोर नहीं ले जाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो हर साल ट्रांसफार्मर को वर्कशाप से स्टोर तक लाने-ले जाने में कॉर्पोरेशन को 30 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे।
नहीं हो सकेगी अवैध वसूली- कॉर्पोरेशन के सख्त निर्देशों के बावजूद स्टोर में ट्रांसफार्मर की लोडिंग-अनलोडिंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। 25 केवीए ट्रांसफार्मर के लिए 250 रुपये, 400 केवीए के लिए 400 रुपये और इससे ज्यादा क्षमता के ट्रांसफार्मर के लिए 800 रुपये तक लेबर चार्ज के नाम पर वसूले जाते हैं। इसकी कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नई व्यवस्था लागू होने से ट्रांसफार्मरों का रिप्लेसमेंट सीधे वर्कशॉप से होगा। इससे अवैध वसूली पर रोक लगेगी।