विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार व लूट-खसोट के मामले तो कई हुए, लेकिन यहां तो कृषि विभाग ने ही अन्नदाता का हिस्सा चट करने की योजना बना ली। रबी सीजन में पीसीएफ की 79 समितियों के माध्यम से जिले के 10 हजार किसानों को अनुदान पर 4536 क्विंटल बीज का वितरण किया गया था।
इसमें 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं का बीज खरीदने वाले किसानों को प्रति किलो 20 रुपये का अनुदान मिलना था। इस बाबत पीसीएफ ने कृषि विभाग को बीती 31 दिसंबर को ही सूची उपलब्ध करा दी, लेकिन छह माह बाद भी कृषि विभाग ने अनुदान नहीं दिया।
10 हजार किसानों का 72.57 लाख रुपये अनुदान कृषि विभाग दबाए बैठा है। अब तो खरीफ का सीजन आ गया और धान, मक्का व अन्य बीजों के वितरण का कार्य शुरू हो गया है।
कृषि विभाग ने रबी सीजन 2015-16 में गेहूं के बीज की बिक्री के लिए यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के माध्यम से जनपद की 79 साधन सहकारी समितियों का चयन किया था। इन समितियों पर करीब 10 हजार किसानों ने 4536 क्ंिवटल बीज की खरीदारी की थी।
रबी सीजन 2015-16 में गेहूं के बीज की खरीदारी पर किसानों को केंद्र सरकार ने 16 रुपये व राज्य सरकार ने चार रुपये की सब्सिडी देने का एलान किया था। दोनाें सरकारों की तरफ से प्रति किलोग्राम गेहूं बीज पर मिलने वाली 20 रुपये की सब्सिडी की यह राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जानी थी।
इस हिसाब से किसानों को 72 लाख 57 हजार छह सौ रुपये की राशि वापस मिलनी थी। सब्सिडी वापसी के लिए साधन सहकारी समितियों ने किसानों के बैंक खातों को ऑनलाइन भी करवाया था और बीज बिक्री के बाद यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन के माध्यम से अनुदान का बिल कृषि उप निदेशक के पास भेज दिया था।
कृषि विभाग ने राज्य सरकार से मिलने वाली चार रुपये की सब्सिडी तो किसानों के खाते में भेज दी, लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी किसानों को नहीं दी। इस तरह केंद्र सरकार से किसानों को मिलने वाली 16 रुपये की सब्सिडी के रूप में 72 लाख 57 हजार छह सौ रुपये की राशि को दबा लिया और उसका भुगतान नहीं किया।
हालत यह है कि पांच माह बीतने के बाद भी यह पैसा किसानों को नहीं मिल सका है और किसान इस सब्सिडी के लिए साधन सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं।
मुजेहना क्षेत्र के गूंगीदेई गांव के रहने वाले किसान कुंवर यशवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने साधन सहकारी समिति माधवगंज से चार क्विंटल गेहूं का बीज खरीदा था। इसके बदले में उन्हें आठ हजार रुपये की सब्सिडी मिलनी थी। लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी उनके खाते में सब्सिडी की रकम नहीं पहुंची।
गूंगीदेई गांव के ही रहने वाले किसान जगदंबा सिंह ने भी साधन सहकारी समिति माधवगंज से दो क्विंटल गेहूं के बीज की खरीद की थी। इसके बदले में उन्हें चार हजार रुपये मिलने थे, जो आज तक नहीं मिले।
गेहूं बीज की खरीद पर सब्सिडी की राशि नगद देने के बजाय डीबीटी स्कीम के तहत सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जानी थी। किसानों ने इसके लिए अपने बैंक खातों को ऑनलाइन भी करवा दिया था, लेकिन फिर भी यह पैसा उनके खातों में नहीं पहुंच सका।
पैक्स सचिव वेलफेयर सोसायटी उत्तर प्रदेश व साधन सहकारी समिति माधवगंज के सचिव दिवाकर तिवारी ने बताया कि किसानों का पैसा वापस न मिलने से समिति पर काम करने वाले कर्मचारियों को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। उन्हाेंने यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन के जिला प्रबंधक से किसानों की सब्सिडी का पैसा दिलाने की मांग की है।
जिला प्रबंधक यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन सौजन्य त्रिपाठी ने कहा कि गेहूं बीज की बिक्री के बाद दिसंबर में ही अनुदान से संबंधित सभी बिलों को कृषि उपनिदेशक को भेज दिया गया था। लेकिन अभी तक किसानों को अनुदान का पैसा नहीं मिल सका है। इसके लिए कृषि विभाग से पत्राचार किया जा रहा है।
उप निदेशक कृषि गोंडा श्रवण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों के खाते में एक हजार रुपये, प्रमाणित बीज योजना के तहत 400 रुपये व सूखा राहत के तहत 600 रुपये प्रति किसानों के खाते में भेजे गए हैं। करीब 700 किसानों के खाते में गड़बड़ी होने के कारण राशि नहीं भेजी जा सकी है। खातों को ठीक कराया जा रहा है।