मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास बंद पड़ी दवा की दुकानें। संवाद
गाजीपुर। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को गाजीपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले जिले के दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानों को बंद कर जुलूस निकाला और प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक अतिरिक्त एसडीएम विनोद जोशी को सौंपा। उधर, दवा की दुकानें बंद रहने से अस्पतालों में आए मरीज 46 डिग्री तापमान और चिलचिलाती धूप में दवा के लिए भटकते नजर आए।
दवा विक्रेताओं की हड़ताल के कारण जिला महिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज अस्पताल को मिलाकर पांच हजार से अधिक मरीज प्रभावित हुए। हालांकि जन औषधि केंद्र खुले रहे, लेकिन वहां सभी दवाओं का स्टॉक नहीं था। इसके कारण मरीजों के तीमारदारों को करीब 46 डिग्री तापमान और तीखी धूप में इधर-उधर भटकना पड़ा। वह शहर में इस आस में घूमते रहे कि शायद कोई दुकान खुली मिल जाए। सबसे अधिक दिक्कत ग्रामीण अंचलों से आने वाले मरीजों और तीमारदारों को हुई। इसके साथ ही नियमित तौर पर दवाओं का सेवन करने वाले लोग भी परेशान दिखे। वहीं क्नीनिक के डॉक्टरों की दवाएं नहीं मिलने से लोग परेशान हुए।
जनपद में दवा की 2750 दुकानें हैं और हड़ताल के कारण करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। संगठन के महामंत्री ब्रजेश पांडेय ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे गाजीपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने मिश्रबाजार से जुलूस निकाला। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस कचहरी पहुंचा, जहां प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक अतिरिक्त एसडीएम विनोद जोशी को सौंपा गया। पत्रक के माध्यम से ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने व छोटे दवा विक्रेताओं को संरक्षण देने की मांग की गई। शहर समेत ग्रामीण अंचलों में भी दवा की दुकानें बंद रहीं। उन्होंने कहा कि बिना किसी वैधानिक प्रावधान के ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन और बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के घर-घर दवा वितरण जैसी गतिविधियां मरीजों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं।