बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना विनोद गुप्ता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही पुलिस और जेल प्रशासन की जांच में अंतर आ सकता है। हालांकि पुलिस अधिकारी मामले में अभी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं लेकिन अब तक मिले सुराग को पुख्ता करने में लगे हैं।
बीते दिनों बिहार, झारखंड, देवरिया, रेवतीपुर (गाजीपुर) से आए 15 लोगों ने एएसपी ग्रामीण अतुल सोनकर से शिकायत की थी। आरोप था कि जेल में बंद विनोद गुप्ता सीधे और कई लोगों के फोन कराकर कह रहा है कि दो लाख रुपये पहले ले लो, कोर्ट में झूठी गवाही दे दो।
छूटने पर बाकी रुपये दे दूंगा। वायरल हो रहे दो ऑडियो को संज्ञान में लेते हुए जेल प्रशासन जांच में जुट गया है। फिलहाल, जांच में विनोद गुप्ता को जेल प्रशासन ने अपनी तरफ से क्लीन चीट दे दिया है।
जेल अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के मुताबिक विनोद ने सामान्य बंदियों की तरह जेल के नियमों का पालन करते हुए 13, 25 और 28 फरवरी को फोन किया है, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने जिन नाम और नंबर को बताया है उसका जिक्र नहीं किया है।
उधर, पुलिस की जांच में यह बात सामने आ रही है कि शिकायत को सीधे खारिज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि शिकायतकर्ताओं ने जिन मोबाइल नंबर को उपलब्ध कराया और जो समय और तारीख बताया है उससे मोबाइल की लोकेशन उसी दिशा में लग रहा है, जहां संदेह किया जा रहा है।
हालांकि कोई जिम्मेदार पुष्टि अभी नहीं कर रहा है। एसपी डाॅ. ईरज राजा ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। पुलिस सही दिशा में काम कर रही है। जल्द सच्चाई सामने आएगी।