फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: हरा, पीला और लाल जोन में बंटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का आपात कक्ष

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकक्ष को हरा, पीला और लाल जोन में बांटा गया है। बीमारी की गंभीरता पर अलग- अलग जोन में रख इलाज किया जाता है।
विज्ञापन

ऐसे में भीड़ नियंत्रित करने में सहूलियत हो रही है। जबकि प्रतिदिन 160 से अधिक मरीज उपचार के लिए आपातकक्ष में पहुंच रहे हैं। यहीं नहीं प्रत्येक जोन में बेड की संख्या भी निर्धारित है, जिसमें सबसे अधिक बेड एलो जोन में है।
शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा गैर जनपदों के अलावा अन्य प्रांतों से भी प्रतिदिन 2500 मरीज परामर्श, जांच और उपचार के लिए ओपीडी पहुंच रहे हैं। आपातकक्ष में भी मरीजों की संख्या बढ़ने से चिकित्सकों को परेशानी होती थी। पूर्व में आए मरीज के शिफ्ट में देरी होने पर बाद में आने वाले मरीज को स्ट्रेचर पर लेटाकर उपचार करना पड़ता है।
विज्ञापन

इस समस्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन आपातकक्ष में तीन जोन में बांट दिया। मरीज को हल्की परेशानी पर उपचार के बाद हरा जोन में डाल दिया जाता है।
जहां से उन्हें दवा देकर छोड़ दिया जाता है। हरा जोन में चार बेड सुरक्षित हैं। जबकि गंभीर मरीजों को पीला जोन में रखा जाता है, जहां 13 बेड हैं।
जहां से मरीज को उपचार के बाद उनकी जैसी तबीयत रहती है, उस मुताबिक वार्ड में भर्ती किया जाता है अथवा चार- पांच घंटे बाद छोड़ा जाता है। अति गंभीर मरीजों को लाल जोन में रखा जाता है। लाल जोन के लिए अलग कक्ष बनाया गया है, जिसे आठ बेड हैं। यहां आवश्यकतानुसार मरीज की जांच के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।
छह बेड के आईसीयू में भर्ती किए जा रहे मरीज

हरा, पीला और लाल जोन में बीमारियों के मुताबिक उपचार चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। इसके बाद ज्यादा गंभीर होने पर आपातकक्ष के छह बेड के आईसीयू में भर्ती किया जाता है। साथ ही मरीजों की 24 घंटे निगरानी के अलावा अत्याधुनिक मशीनों से चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है। खासकर गंभीर मरीजों को वहां वेंटिलेटर और बेड पर ही जांच की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
नेशनल मेडिकल कमिशन के निर्देशानुसार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकक्ष को तीन जोन में बांटा गया है। इससे मरीजों के उपचार में सहूलियत मिल रही है। खासकर अचानक बढ़ रही भीड़ पर आसानी से नियंत्रण करने में मदद मिल जाती है। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज गाजीपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें