गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के स्थापित होने के बाद जनपद चिकित्सकीय सुविधाओं का हब बन चुका है। स्थिति यह है कि तीन हजार से ऊपर की ओपीडी प्रतिदिन हो रही है। मऊ, बलिया, चंदौली, आजमगढ़ और बक्सर से प्रतिदिन मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक मरीज मेडिसिन विभाग में पहुंच रहे हैं। आर्थो, स्कीन और सर्जरी के भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। एक महीने में सड़क हादसों में 225 घायल यहां इलाज के लिए पहुंचे।
शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा पहुंचाने के लिए मेडिकल काॅलेज अस्पताल प्रशासन की ओर से लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। आंकड़ों को देखा जाए तो ओपीडी में करीब 3500 विभिन्न बीमारियों के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे अधिक 750 मरीज मेडिसिन विभाग में तो हड्डी विभाग और स्कीन संबंधित मरीजों की भी संख्या अच्छी खासी है। यहीं नहीं ईएनटी के भी मरीजों की संख्या इन दिनों बढ़ गई है। जबकि सड़क हादसों में घायल के आंकड़ों को देखा जाए तो 225 मरीज एक माह पहुंचते हैं। इसमें 10 -15 मरीज को छोड़कर अन्य स्वस्थ होकर घर पहुंच चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि प्रतिदिन 3500 मरीज ओपीडी को पहुंच रहे हैं। इनके उपचार व जांच की पूरी सुविधा मुहैया कराई जा रही है। साथ ही मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया गया है।
साढ़े चार सौ बेड से लैस हैं मेडिकल कॉलेज अस्पताल
मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल में जहां करीब 350 बेड की सुविधा है। वहीं महिला अस्पताल में 100 बेड हैं। वहीं विभिन्न बीमारियों के चिकित्सकों की संख्या 150 है। इसमें आठ फिजिशियन, हड्डी विभाग के छह, सर्जन सात,त्वचा के एक और बच्चों के पांच डॉक्टर हैं। वहीं ईएनटी के तीन, आंख के तीन, डेंटल के पांच और महिला रोग विशेषज्ञ पांच तैनात हैं। जबकि विभिन्न बीमारियों की जांच के पैथोलॉजी लैब से संबंधित चिकित्सकों की संख्या 14 है।
कैंसर की प्राथमिक तो ब्लड व यूरिन कल्चर की होती है जांच
पुरुष अस्पताल में सामान्य से गंभीर बीमारियों की जांच होती है। इसके कैंसर की प्राथमिक जांच तक शामिल हैं। वहीं ब्लड और यूरिन कल्चर के आटोमैटेड मशीन भी स्थापित है। वहीं आपातकक्ष के संचालन और वार्ड की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। वहीं अस्पताल द्वारा प्रत्येक मरीजों को भोजन के अलावा निर्धारित मानक के अनुरुप आहार भी उपलब्ध कराया जाता है।