मरदानपुर-गुरैनी स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में बोलते पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती - सं
मनिहारी। गाय को केवल एक पशु के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गो माता का विशेष स्थान रहा है। यह बातें गो- रक्षापीठ के पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को शादियाबाद क्षेत्र के मरदानपुर-गुरैनी स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में कहीं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में भी बच्चों को गाय को सिर्फ जानवर के रूप में पढ़ाया जाता है। अगर उन्हें गो माता के रूप में इसकी महत्ता बताई जाती, तो देश का भविष्य अधिक जागरूक और संस्कारवान बनता। वेदों और सनातन धर्म के ग्रंथों में गाय को सामान्य पशु नहीं माना गया है।
समाज को गो संरक्षण और उसकी महत्ता के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी उनसे मिलने आए थे। सांसद ने गाय को राष्ट्र माता घोषित किए जाने की बात कही थी। इस विषय पर विरोध की स्थिति चिंताजनक है। मुझे तो ऐसा लगा कि इसका विरोध मुसलमानों को करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका विरोध तथाकथित हिंदू व भारत सरकार कर रही है।