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अध्यापक ही नहीं, पढ़े, पढ़ाए कौन

Thu, 14 Apr 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
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टीचर - फोटो : file photo
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कभी राजकीय इंटर कालेजों में नाम लिखाने के लिए मारामारी होती थी। मंत्री तक से सिफारिश कराई जाती थी। आज स्थिति यह है कि इन स्कूलों को विद्यार्थी खोजने पड़ रहे हैं। दरअसल राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में सेवानिवृत्ति से रिक्त पदों पर नियमित रूप से न तो प्रधानाचार्यों की नियुक्ति हुई और न शिक्षकों की। नतीजतन जिले के 25 ऐसे स्कूल-कॉलेजों में से 13 में प्रधानाचार्य नहीं हैं और 245 शिक्षकों का काम महज 93 अध्यापक देख रहे हैं।
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जिले में बालकों की शिक्षा के लिए राजकीय सिटी इंटर कॉलेज है। कभी इस कॉलेज में आसानी से प्रवेश नहीं मिलता था। इसके लिए लोग मंत्रियों और सांसदों तक से सिफारिश कराते थे। आज नौबत यह है कि यहां छात्र प्रवेश लेना नहीं चाहते हैं। इसकी वजह अध्यापकों की कमी है। कई विषयों के अध्यापक हैं ही नहीं। जिले में 11 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हैं। राजकीय बालिका इंटर कालेज गाजीपुर के अलावा अन्य विद्यालयों में 50 से 100 के बीच ही छात्राएं हैं। एक-दो राजकीय बालिका इंटर कालेजों को छोड़कर कहीं प्रधानाचार्य नहीं हैं।

अध्यापिकाओं को ही प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा 13 स्कूलों को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत अपग्रेड करके हाई स्कूल बनाया गया था। इस तरह कुल 25 प्रधानाचार्य पद हैं लेकिन तैनाती केवल 12 की है। इन विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 245 पद सृजित हैं। वर्तमान में सिर्फ 93 शिक्षक ही कार्यरत है। अध्यापकों के 152 रिक्त पदों को कब तक भरा जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे में विद्यार्थी भी इन विद्यालयों का रुख करने से कतरा रहे हैं।
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