शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को देवी के दरबार में हजारों की संख्या में भक्तों ने हाजिरी लगाकर मातारानी के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का दर्शन-पूजन किया।
उन्होंने नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित कर मां का पूजन-वंदन कर उनसे परिवार की कुशलता की कामना की। शंख-घंट बजने के साथ ही जय माता दी के जयकारे से मंदिर परिसर गूंज उठे। कामाख्या मंदिर में खाद्य सामग्रियों का भोग लगाकर तरह-तरह के पुष्पों से मां का शृंगार किया गया।
नवरात्र के नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। घरों और मंदिरों में कलश की स्थापना कर मातारानी की विधिवत पूजा आराधना की जा रही है।
दूसरे दिन मां दुर्गा के ‘देवी ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा करने का विधान है। शहर के मिश्रबाजार, महुआबाग, सकलेनाबाद, लंका, नवापुरा, पीरनगर, नवाबगंज, रौजा, काली धाम एवं हमीद सेतु स्थित काली मंदिर में जगत जननी का दर्शन करने के लिए भोर से ही भक्त पहुंचने लगे थे।
उन्होंने आसपास स्थित दुकानों से चुनरी, नारियल, फल-फूल, धूप-दीप, नैवेद्य आदि लेकर देवी मां के चरणों में अर्पित किया। उनसे परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। सुबह से शुरु हुआ दर्शन-पूजन का क्रम रात तक चलता रहा।
इस दौरान कई भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया। गहमर क्षेत्र के मां कामाख्या धाम पर मंगला आरती के बाद कपाट भक्तों के लिए खोले गए।
महंत आकाशराज तिवारी ने बताया कि दूसरे दिन लगभग 30 हजार भक्तों ने मां के दरबार में मत्था टेका।