इसी क्रम में कहा कि देश के अंदर नियति अपना कार्य कर रही है। इसलिए लोगों को नियति का पालन करना चाहिए। रामसेतु के निर्माण में भी गिलहरी का बहुत बड़ा किरदार था। अगर गिलहरी अपने बेटे को यह बताई होती कि हमारे दादा-दादी ने भी रामसेतु में अहम भूमिका निभाई थी तो उसके बच्चे भी उसकी चर्चा करते।
महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति ने कहा कि हम लोगों को एक अवसर मिला जहां पर सरसंघचालक मोहन भागवत का बुढ़िया माई धाम आने का और हम लोगों के बीच में सुनने का विचार उत्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत से उज्जैन में मेरी मुलाकात हुई थी। उसी समय मोहन भागवत ने बताया कि काशी आएंगे तो जरूर हथियाराम मठ पर आएंगे।