शिवरायकापुरा एवं सेमरा गांव को कटान से बचाने के लिए लगभग 23 करोड़ की लागत से गंगा के तट पर 15 सौ मीटर ठोकर बनाया गया। ठोकर के 50 मीटर हिस्से गंगा में बह जाने से गांववासियों की नींद गायब हो गई है।
दो वर्ष में शिवरायकापुरा का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा एवं सेमरा गांव का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कटान में समा जाने के बाद मची चीख पुकार पर गांव को बचाने की कवायद शुरू हुई। सांसद नीरज शेखर के प्रयास से गांव के बचे हुए हिस्से को बचाने के लिए ठोकर का निर्माण शुरू हुआ। प्रारंभ से ही घटिया निर्माण एवं मानक की अनदेखी के कारण ठोकर निर्माण से गांव के बच पाने पर ग्रामीणों ने आशंका जताते हुए विरोध जताया। सिंचाई विभाग के अधिकारी एवं ठेकेदारों की मिली भगत के चलते ग्रामीणों की आवाज अनसुनी कर दी गई है। गंगा का जलस्तर जैसे ही बढ़ा ठोकर के ऊपर से पानी बहने लगा और घटने के साथ ही ठोकर का एक बड़ा हिस्सा शनिवार को गंगा की धाराओं में बह गया। रविवार को भी ठोकर का कुछ भाग टूटकर गंगा की धाराओं में विलीन हो जाने से ग्रामवासियों में दहशत व्याप्त हो गया है। गांव बच पाएगा या नहीं इस बात की चिंता ग्रामीणों को सताने लगी है।