वर्ष 1974 में उत्तर प्रदेश की सैदपुर विधानसभा क्षेत्र की सीट सामान्य हुआ करती थी। तब भी इस सीट से सामान्य वर्ग के प्रत्याशी को जीतने में पसीना छूटता था। उस वक्त भी यह सीट जातीय समीकरण में पूरी तरह से जकड़ी हुई थी और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का वर्चस्व बना था।
इसके पूर्व 1969 में इस सीट से चौधरी चरण सिंह के चहेते रामकरन यादव भारतीय क्रांति दल के टिकट पर यहां से निर्वाचित हुए थे। उन्होंने तत्कालीन एमएलसी एवं संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (संसोपा) के प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता प्रभुनारायण सिंह को हार का स्वाद चखाया था। प्रभुनारायण सिंह उस समय हिंद मजदूर पंचायत के नेता एवं पूर्वांचल में समाजवादी आंदोलन के जुझारू नेता थे। प्रभु नारायण सिंह इस हार से तिलमिला उठे थे। उन्होंने राजनीति की गोटी नए तरीके से बिछाने का मन बनाकर एक नया इतिहास रचा। चंदौली में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आमंत्रित कर अपने कई प्रभावी साथियों के साथ उन्होंने कांग्रेस में अपना ध्रुवीकरण कर लिया। इस दौरान उन्होंने खुलकर बयान दिया कि अब कांग्रेस के बिना समाजवादी आंदोलन को ऊपर उठाया नहीं जा सकता। समय आ गया है कि समाजवादी लोग कांग्रेस के साथ मिलकर समाजवादी आंदोलन को धार दें। प्रभुनारायण सिंह ने पूरी ताकत झोंक कर वहां जिस तरह की भीड़ जुटाई थी उसे देखकर इंदिरा गांधी बहुत खुश थीं। प्रभु नारायण और उनके साथ आए कल्पनाथ राय जैसे कई नेताओं को पूर्वांचल में एक साथ अपने खेमे में पाकर इंदिरा गांधी खुश थीं। प्रभुनारायण की मांग पर उन्हें सैदपुर विधानसभा सीट से 1974 में कांग्रेस का प्रत्याशी बना दिया। इस बार की लड़ाई में उनको सवर्णों के साथ अन्य वर्ग का अच्छा खासा समर्थन मिला और उन्होंने सैदपुर विधानसभा सीट से विजय हासिल कर रामकरन यादव को हराकर अपना पिछला हिसाब भी चुकता कर लिया।
सैदपुर से उनका विजय जुलूस जब निकला तो विरोधियों की आंखें चकाचौंध हो गई थी। उन्हें उस वक्त की हेमवती नंदन बहुगुणा के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल ने देश में कांग्रेस की जड़ें हिला दी थी और 1977 में पूरे देश में जनता पार्टी का परचम लहराने लगा। कांग्रेस का तो उस वक्त देश के सात प्रांतों में खाता तक नहीं खुल सका था। 1977 के पूर्व तक अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने सैदपुर विधानसभा क्षेत्र का जिस तरह विकास किया वह आज भी लोगों की जेहन में ताजा हैं। सैदपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और देवकली पंप नहर का विस्तार जैसे बुनियादी कार्यों के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है।