वायु प्रदूषण की समस्या से ग्रस्त सत्रह जिलों में गाजीपुर शामिल तो नहीं है लेकिन यहां धान और गेहूं की कटाई के बाद पराली जलाने से प्रदूषण की आशंका रहती है। चिकित्सकों की मानें तो धूल और धुआं श्वांस रोगियों के लिए खतरनाक साबित होता है। ऐसे में प्रदूषण से बचने के लिए पराली नहीं जलानी चाहिए और सांस की बीमारी से पीड़ित रोगी को धूल और धुआं से बचना चाहिए।
पूर्वांचल के कुछ जिलों में प्रदूषण की गंभीर समस्या है। प्रदूषण की मार जब शुरू होती है तो सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ती है। सबसे अधिक दिक्कत सांस के मरीजों को उठानी पड़ती है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता काफी जरूरी है। करीब 40 लाख से ऊपर आबादी वाले गाजीपुर जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई भी यंत्र नहीं लगाया गया है, जिससे यहां के एयर क्वालिटी इंडेक्स की जानकारी मिल सके। हालांकि वाराणसी के क्षेत्रीय कार्यालय से स्थिति पर नजर रखने के साथ ही कभी-कभी जांच की जाती है। प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय के अधिकारियों मानें तो जनपद में प्रदूषण नहीं है। हालांकि पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है।