बच्छलकापुरा-रामपुर पीपापुल पर लगी लोहे की प्लेट कुंभ मेला में चली जाने के कारण पुल लोगों के आने-जाने के लिए बंद कर दिया गया था। अब लोगों के आवागमन के लिए इसे चालू कर दिया गया है। शादी-विवाह का मौसम होने के कारण लोग आधे-अधूरे पीपा पुल से जाने के बजाय 40 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर हमीद सेतु से जाने को बाध्य हैं।
इस वर्ष पीपा पुल बनकर पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ था कि महाकुंभ के समाप्त होने तक के लिए उसे बंद करने का आदेश आ गया। पुल से गंगा के दियारा में बिछाई गई 220 लोहे की प्लेट को महाकुंभ मेला में भेजा दिया गया था। प्रयागराज में महाकुंभ के चलते गंगा में पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर बढ़ जाने से रामपुर के छोर की तरफ एप्रोच पर पानी चढ़ गया था, जिससे आवागमन बंद हो गया था।
अब पानी घट जाने से रामपुर की तरफ रेत में कुछ दूर तक लोहे की चादरें बिछाकर आवागमन शुरू कर दिया गया है लेकिन शेष प्लेटों पर रेत चढ़ जाने से चार पहिया वाहन चालकों को आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा पार से जान जोखिम में डालकर चालक आलू से लदे ट्रैक्टर ट्राॅली लेकर इस आधे-अधूरे पीपापुल से आ-जा रहे हैं।
पुल की व्यवस्था में लगे लोगों का कहना है कि इस पर आवागमन शुरू करा दिया गया है लेकिन जब तक यहां से गई सभी लोहें की प्लेटें नहीं आ जाती है और उन्हें बिछा नहीं दिया जाता है तब तक सुचारु रूप से आवागमन नहीं हो सकेगा। जो प्लेटें बिछी भी हैं आलू लदे ट्रैक्टरों के आने-जाने से रेत से ढक जा रही हैं।