फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहीद के आखिरी शब्द: भईया प्रणाम..कैसे हैं? ड्यूटी से आ गए, मैं मार्च में जाऊंगा घर; ये कहकर भर आई भाई की आंखें

Sat, 16 Dec 2023 03:13 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर

सार

दो भाइयों में छोटे अखिलेश कुमार राय ने 2002 में बीएसएफ में नौकरी पाए थे। मिलनसार प्रवृत्ति के अखिलेश आखिरी बार छठ पर घर आए थे। इस दौरान रिश्तेदारों के यहां आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। साथ ही घर का काफी कार्य भी कराए थे। जल्द ही आने की बात कहकर आठ दिसंबर को ड्यूटी पर वापस लौटे थे।
विज्ञापन
शहीद के आखिरी शब्द - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के लाल व बीएसएफ के जवान अखिलेश कुमार राय की शहादत के बाद हर कोई उन्हें नमन कर रहा है। उनके बड़े भाई व बीएसएफ दिल्ली में तैनात अंजलेश कुमार राय घर आ गए हैं। अब उनके कंधों पर जिम्मेदारियों का भार और बढ़ गया। वे कहते हैं कि तीन दिन पहले उनकी छोटे भाई (अखिलेश कुमार राय) से बात हुई थी। अखिलेश बोले- भईया प्रणाम, कैसे हैं, ड्यूटी से आ गए, कुछ खा लीजिए। भईया, मामा के घर भतीजी की जनवरी में शादी है। मैं पहुंच नहीं पा रहा हूं, मुझे अब मार्च में छुट्टी मिलेगी, तब घर आऊंगा आप शादी में चले जाइएगा। यह बातें कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।

विज्ञापन




दो भाइयों में छोटे अखिलेश कुमार राय ने 2002 में बीएसएफ ज्वॉइन किया था। मिलनसार प्रवृत्ति के अखिलेश आखिरी बार छठ पर घर आए थे। इस दौरान रिश्तेदारों के यहां आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए थे। जल्द ही आने की बात कहकर आठ दिसंबर को ड्यूटी पर वापस लौटे थे। इस दौरान जो-जो अखिलेश कुमार राय से मिले थे वो बस अपने साथ हुई बातचीत को ही कहते हुए भावुक हो जा रहे थे। बड़े भाई अंजलेश राय के चेहरे पर अपने अनुज अखिलेश कुमार राय से बिछड़ने का दर्द साफ झलक रहा था।

अखिलेश कुमार राय के चचेरे भाई - फोटो : संवाद
वह बार-बार यही कहते थे कि पिता जी की मौत के बाद वह बड़े जरूर थे, लेकिन काफी जिम्मेदारियां अखिलेश राय ही संभाल लेते थे, अब उनके न रहने पर परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ पड़ी है। वहीं, उनके ननिहाल असावर में भी मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। ननिहाल में भी दो दिनों से चूल्हे नहीं जले। वहीं, गाजीपुर में चंदन नगर में भी लोग शहीद अखिलेश को लेकर पूरे दिन चर्चा करते रहे। यहां भी लोग अखिलेश को लेकर चर्चाएं कर रहे थे। साथ ही देश सेवा में लगे अपने लाल को लेकर गर्व होने की बात कह रहे थे।

मैं बड़ा भाई हूं, वह मेरा बचपन से ही बहुत सम्मान करते थे। इसलिए कम बात करते थे। अभी तीन दिन पहले ही हम दोनों भाइयों की बात हुई थी। मुझे गर्व है कि मेरे ने भाई देश की सेवा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। लेकिन, परिवार को बहुत बड़ी क्षति हुई है,जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। -अंजलेश कुमार राय, शहीद के बड़े भाई

 

अखिलेश कुमार राय बचपन में असावर बहुत रहे हैं। वह बहुत होनहाल थे। छुट्टी में जब भी आते तो असावर जरूर आते थे। पास-पड़ाेस के लोगों से बिना मिले नहीं जाते थे। एक बार जो जिससे बात कर लेते थे मानों उसे अपना बना लेते थे। - अनिल राय असावर, मामा के बेटे

अखिलेश कुमार राय हमारे हम उम्र के थे। सेना में भर्ती से पहले गांव के अखाड़े में कुश्ती लड़ते थे। उन्होंने गांव के बच्चों को भी कुश्ती सिखाया करते थे। जब भी गांव आते थे, सभी के दरवाजे जाकर हाल चाल लेते थे। ड्यूटी के दौरान भी फोन के माध्यम से गांव के लिए हमेशा कुछ नया सोचते रहते थे। - जयानंद राय, ग्राम प्रधान के पति

 
विज्ञापन

अखिलेश कुमार राय मेरे बचपन के मित्र थे। साथ रहते, कुश्ती लड़ते और वालीबॉल भी खेलते थे। बीएसएफ में जाने के बाद वो हमेशा मेरे संपर्क में रहते थे। जब भी बात होती तो कहते थे कि गांव के गरीब लोगों की मदद कैसे की जाए। आज तक उन्होंने कोई नशा नहीं किया। -धन्नजय राय, बालीबाल के राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता

सन् 1994 के बाद अखिलेश राय शेरपुर में पहले देश भक्त सैनिक हैं, जो देश के लिए शहादत दिए हैं। बचपन से ही उनके अंदर देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। -विंध्याचल उपाध्याय पूर्व शिक्षक, शेरपुर

जब अखिलेश राय गांव आते थे, स्थानीय शहीद पार्क में अवश्य जाया करते थे औक अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रद्धांजलि दिया करते थे। शेरपुर के बलिदानियों के इतिहास में अमर बने रहेंगे। उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। वे नौजवानों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।-डॉक्टर रमेश राय।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें