फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपने व्यवहार को दूसरों के प्रति मनोहारी बनाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
स्थानीय गांव स्थित संत श्री मानदास बाबा की तपोस्थली में धनुषयज्ञ मेले के पूर्व नौ दिवसीय रामचरितमानस कथा महायज्ञ आयोजित है। कथा के पांचवें दिन शुक्रवार की देर शाम बाल कलाकारों ने ताड़का वध का मंचन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर कथा वाचक प्रीति उपाध्याय ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान की विचित्र कथाएं हैं। बुद्धि से नहीं पकड़ी जाती, कथाओं को आचरण में उतारने का प्रयास करें। प्रभु श्रीराम के चरित्र की कथाएं सुनकर अपने व्यवहार को दूसरों के प्रति मनोहारी बनाएं।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जब भी विश्वामित्र यज्ञ करते थे तो मारीच सुबाहु का आतंक सताने लगता था। इससे विश्वामित्र बड़े चिंतित हुए। विश्वामित्र जी ने ध्यानमग्न होकर देखा तो उन्हें ज्ञात हुआ कि दुष्टों का अंत करने के लिए राम रूप में भगवान राजा दशरथ के घर अवतरित हो चुके हैं। प्रीति उपाध्याय ने कहा कि यज्ञ के रक्षार्थ मुनि विश्वामित्र अयोध्या के महाराज दशरथ के दो पुत्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ लाते हैं। मार्ग में प्रभु श्रीराम ताड़का नाम की राक्षसी का वध करते हैं। मुनि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को अपने आश्रम में लाकर उन्हें कंदमूल फल का भोजन कराते हैं। सुबह उठकर दोनों राजकुमार गुरुदेव को प्रणाम कर कहते हैं कि मुनि देव अब आप निडर होकर यज्ञ कीजिए। यह सुनकर आश्रम के सभी मुनि यज्ञ करने लगते हैं। श्रीराम और लक्ष्मण यज्ञ की रखवाली करते हैं। राक्षस यज्ञ भंग करने के लिए आक्रमण करते हैं। कथा वाचक प्रीति उपाध्याय ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि श्रीराम और लक्ष्मण राक्षसों का नाश कर देते हैं। इसके बाद जनकपुरी में धनुष यज्ञ का निमंत्रण मिलने के बाद श्री राम-लक्ष्मण मुनि विश्वामित्र के साथ जनकपुरी के लिए रवाना हो जाते हैं। रास्ते में अहिल्या शिला का उद्धार करते हैं। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें