Lok Sabha Election: गठबंधन धर्म निभा रहे सुभासपा भी पशोपेश में हैं। अब इन दोनों दलों को डर है कि कहीं मतदाता सुभासपा के चुनाव चिह्न समझकर वोट न कर दें। यदि ऐसा होता है तो भाजपा प्रत्याशी का बड़ा नुकसान हो जाएगा और इसका लाभ विपक्ष को मिलेगा।
समाजवादी पार्टी के टिकट पर अफजाल अंसारी तो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उनकी बेटी नुसरत अंसारी चुनावी मैदान में हैं। नुसरत खुद की बजाए अपने पिता के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रही हैं।
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नुसरत अंसारी को छड़ी चुनाव चिह्न आवंटित हुआ है। मगर यह चुनाव चिह्न सुभासपा के चुनाव चिह्न के रूप में जनपद में जाना जाता है। जबकि सुभासपा ने भाजपा को समर्थन दे दिया है। ऐसे में भाजपा और सुभासपा ने इस चुनाव चिह्न को बदलने की मांग को लेकर निर्वाचन आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई है।
गाजीपुर लोकसभा सीट पर इस बार चुनाव काफी रोमांचक मोड़ हो गया है। सपा ने पांच बार विधायक और दो बार सांसद बने अफजाल अंसारी को अपना प्रत्याशी बनाया है। अफजाल अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामले में अगली सुनवाई 20 मई को होनी है।
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चर्चा है कि अगर फैसला उनके खिलाफ आया तो वे अयोग्य घोषित हो जाएंगे और चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। वहीं, अफजाल को पूरी उम्मीद है कि कोर्ट से फैसला उनके ही पक्ष में आएगा। ऐसे में वे खुद सपा के सिंबल पर मैदान में हैं और एहतियातन उन्होंने अपनी बेटी नुसरत अंसारी को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार दिया है।
प्रतीक आवंटन के दौरान नुसरत अंसारी ने आप्शन में छड़ी को भी चुनाव चिह्न के रूप में दिए जाने की मांग की, जो सुभासपा का चुनाव चिह्न माना जाता है। लेकिन भाजपा को समर्थन देने वाली सुभासपा ने इस चुनाव चिह्न को अधिकृत नहीं कराया। ऐसे में यह चुनाव चिह्न निर्वाचन आयोग में फ्री चिह्न के रूप में है। जबकि गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच प्रतिशत से अधिक राजभर मतदाता हैं। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी की परेशानी बढ़ गई है।