स्थानीय गांव की अनुसूचित जाति बस्ती में बारह वर्ष पूर्व निर्मित परिवार कल्याण उपकेंद्र (जच्चा-बच्चा केंद्र) आज तक नहीं खुल सका। निर्माण के बाद से ही इस केंद्र पर ताला लटका है। अब तो भवन भी जर्जर हो गया है। लाखों रुपये के उपकरण भी बेकार हो गए हैं। कई बार शिकायत के बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सुहवल गांव की अनुसूचित जाति की बस्ती में वर्ष 2008-09 में पचीस लाख की लागत से परिवार कल्याण उपकेंद्र (जच्चा-बच्चा केंद्र) का निर्माण तो कराया गया था। केंद्र पर उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। केंद्र पर उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों के लिए पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की गई थी। निर्माण के बाद से आज तक यह केंद्र चालू नहीं हो सका जिससे क्षेत्र की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है । महिलाओं को प्रसव के लिए दूसरे केंद्र का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। लेकिन आज तक लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका। अब परिवार कल्याण उपकेेंद्र का भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। यहां रखे गए लाखों रुपये के उपकरण लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं।