गाजीपुर। कहीं बीमार न बना दें जल निगम की पानी टंकियां क्योंकि सफाई में बरती जा रही लापरवाही से लोग काफी सशंकित हैं। लोगों का कहना है कि प्यास बुझाने को बनाए गए ओवर हेड टैंक (ओएचटी) की सफाई में लापरवाही बरती जा रही है। इसमें सबसे बुरा हाल ग्राम पंचायतों को सौंपी गई टंकियों का है। जहां साफ-सफाई के नाम पर कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।
कुछ ऐसा ही हाल शहरी क्षेत्रों की पानी टंकियों का है।वर्तमान में जिले के 1238 ग्राम पंचायतों में विभिन्न क्षमता वाली कुल 162 पानी टंकी है, जिसमें से सैकड़ों कनेक्शनधारी जुड़े है। इनमें से 95 की देखरेख जल निगम के जिम्मे है। शेष 67 पानी टंकियों को ग्राम पंचायतों को सुपुर्द कर दिया गया है। जिसका संचालन पंचायतें खुद करती है। विभाग की मानें तो समय-समय पर पानी टंकियों की सफाई और दवाओं का मिश्रण किया जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, विभाग सफाई को लेकर बेपरवाह बना हुआ है। आमतौर पर प्रत्येक वर्ष पानी की टंकियों की सफाई का निर्देश है, लेकिन विभाग और पंचायतों की ओर से पानी के टंकी की सफाई शायद ही कभी कराई जाती है।
इधर, विभाग की मानें तो टंकियो की सफाई के लिए शासन से कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं आती है। कनेक्शधारियों से होने वाले राजस्व की आमदनी से ही सफाई करानी पड़ती है। टंकी के अंदर पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए अनिवार्य रूप से ब्लिचिंग पाउडर से इसकी सफाई की जाती है।
उपभोक्ताओं के अनुसार, लोगों को शुद्ध पेयजल मिले, इसके लिए पानी टंकी की नियमानुसार समय-समय पर सफाई किए जाने का प्रावधान है परंतु लापरवाही का आलम है कई सालों से टंकी की सफाई ही नहीं कराई गई। बहुत जगहों पर तो पाइपलाइन जाम और टूटी पड़ी है । जिससे आए दिन जलभराव होनेके साथ ही हजारो लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
इस संबंध में जलनिगम खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता अमन यादव ने बताया कि विभाग का पहला जोर लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल आपूर्ति का है। रहा सवाल टंकी की के साफ सफाई का तो शासन से इसके लिए अलग से कोई नहीं आता है। उपभोक्ताओं से होने वाले राजस्व आमदनी से ही सफाई कराई जाती है।