कासिमाबाद। जीवन भर गरीबों, शोषितों के लिए संघर्ष करने वाले इकबाल अहमद जिन्हें लोग नेता जी के नाम से जानते और पुकारते थे किसी परिचय के मोहताज नहीं रहे। दो फरवरी 1993 में कासिमाबाद विकासखंड के सोनबरसा गांव के एक रईस परिवार में जन्म लेने वाले इकबाल अहमद ने स्वतंत्रता सेनानी एवं सांसद सरजू पांडेय के नेतृत्व में 1957 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर दर्जनों आंदोलनों का नेतृत्व किया। गरीबों, शोषितों को न्याय दिलाने के लिए वह जीवन भर संघर्ष करते रहे।
राजनीति में सरजू पांडेय को नेता मानकर 1957 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण किया तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक पाठशाला में हुई। वे सांसद, विधायक तो नहीं बन पाए लेकिन उनकी लोकप्रियता किसी बड़े नेता से कम नहीं थी। 1980 के दशक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं खेत मजदूर यूनियन की तरफ से आयोजित आंदोलन में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सामने उनके साथियों को पुलिस ने रोक दिया था। इसके बाद भी जब वे नहीं रुके तो पुलिस ने उन्हें घोड़ों से रौंद कर तितर-बितर करते हुए गिरफ्तार कर लिया था। इस आंदोलन में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस आंदोलन से वह पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गए थे। पूर्वांचल सहकारी कताई मिल के उद्घाटन के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को गरीबों, मजदूरों को हक दिलाने के लिए जब काला झंडा दिखाया तो उस समय भी पुलिसिया कहर का शिकार हुए। भाकपा के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों में बड़ी जिम्मेदारी भी निभाई है। 11 अक्तूबर 2019 को उनका इंतकाल हो गया। उनकी लोकप्रियता का आलम यह रहा कि इंतकाल के बाद उनके जनाजे में जो भीड़ उमड़ी वह आज तक किसी अन्य नेता के जनाजे में नहीं दिखी।