जीएम के पास नीमच स्थित अफीम फैक्टरी का भी अतिरिक्त प्रभार था। जहां उनके भ्रष्टाचार की जड़े शाखाओं की तरह फैल गई थी, जिससे एसीबी की टीम अब खोदने की तैयारी में जुट गई है। प्रयागराज के रहने वाले आईआरएस अफसर शशांक यादव महाप्रबंधक से पूर्व दूसरे पद पर तैनात थे। इनके गिरफ्तारी की जानकारी होते ही कारखाना पहुंचे कर्मचारियों एवं अधिकारियों में चर्चा भी तेज हो गई।
उनकr समझ में ही नहीं आ रहा था कि महाप्रबंधक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठकर कैसे भ्रष्टाचार की जड़ों को मजबूत किया जाता है। हालांकि पूर्व में इस तरह का कोई आरोप महाप्रबंधक पर नहीं है। ऐसे जीएम के इस कुकृत्य से कर्मचारियों एवं अधिकारियों के हड़कंप मचा हुआ है।
अफीम काश्तकारों से अवैध वसूली के मामले में पकड़े गए गाजीपुर की अफीम फैक्टरी के महाप्रबंधक (आईआरएस) शशांक यादव को रविवार को एसीबी न्यायालय में पेश किया गया। यहां से उसे एसीबी को चार दिन के रिमांड पर सौंप दिया गया।
कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि एसीबी कोटा के पुलिस निरीक्षक अजीत सिंह बगडोलिया ने शशांक यादव को जज प्रमोद कुमार मलिक के सामने पेश किया। एसीबी टीम ने शनिवार सुबह उदयपुर-कोटा मार्ग पर हैंगिंग ब्रिज टोल नाके के पास से आरोपी शशांक को पकड़ा था। आरोपी की कार में रखे बैग में मिले मिठाई के डिब्बे से 15 लाख रुपए मिले थे, जबकि लैपटॉप के बैग और पर्स से 1 लाख 32 हजार 410 रुपए बरामद हुए थे। इन रुपयों का वह कोई हिसाब नहीं दे पाया था। इस कारण जब्त कर लिए गए।