गंगा नदी के रास्ते भारत की संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव लेने निकला एमवी गंगा विलास क्रूज सोमवार को 15 स्विस पर्यटकों को लेकर काशी के लिए रवाना हो गया। धरम्मरपुर गंगा सेतु के नीचे से गुजरते हुए सुविधाओं से लैस विशाल क्रूज को देखने के लिए नदी किनारे ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने मोबाइल फोन से उसकी तस्वीरें और वीडियो बनाए।
जलमार्ग पर सुरक्षित आवागमन के लिए एक सहायक जहाज भी क्रूज के आगे चल रहा था, जो नदी के रास्ते को क्लीयर कर रहा था। गंगा की धारा में आगे बढ़ते इस क्रूज को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा।
कॉर्नवालिस के मकबरे का किया दीदार
क्रूज के गाइड सब्यसाची भट्टाचार्य ने बताया कि 15 विदेशी पर्यटकों को लेकर गंगा विलास 12 अक्तूबर को कोलकाता से रवाना हुआ था। रविवार, 25 अक्तूबर को यह गाजीपुर के हमीद सेतु के पास पहुंचा, जहां लंगर डाला गया। इस दौरान पर्यटकों ने गाजीपुर शहर का भ्रमण किया और ऐतिहासिक लॉर्ड कॉर्नवालिस के मकबरे को देखा। शहर भ्रमण के बाद पर्यटकों ने क्रूज पर ही रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह क्रूज वाराणसी के लिए बढ़ गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, क्रूज 28 अक्तूबर को काशी पहुंचेगा। वहां पर्यटक श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित वाराणसी के अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। साथ ही विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में भी शामिल होंगे।
कोलकाता से काशी तक 1350 किमी से अधिक का सफर
गाइड सब्यसांची भट्टाचार्य के अनुसार, कोलकाता से वाराणसी तक गंगा के रास्ते की दूरी लगभग 1350 किलोमीटर से अधिक है। इस यात्रा को पूरा करने में दो सप्ताह से ज्यादा समय लगता है। नदी की परिस्थितियों और बहाव के आधार पर क्रूज की गति आठ से 20 किलोमीटर प्रति घंटे रहती है। -
क्रूज में 18 सुइट्स, जिम से लेकर बटलर सेवा तक
एमवी गंगा विलास को नदी पर तैरते फाइव स्टार होटल जैसा बनाया गया है। तीन मंजिला इस क्रूज में जिम, ओपन-एयर ऑब्जर्वेशन डेक, पर्सनल बटलर सेवा, फ्रेंच बालकनी, एलईडी टीवी और आधुनिक शॉवर युक्त बाथरूम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें पर्यटकों के ठहरने के लिए 18 विशेष सुइट्स बनाए गए हैं। साथ ही भारतीय और कॉन्टिनेंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी है। वर्ष 2023 से संचालित इस क्रूज की लंबाई 62 मीटर, चौड़ाई 12.8 मीटर और कुल ऊंचाई नौ मीटर है।