कई दिनों से गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्घि शुक्रवार को भी जारी रही और दिन में तीन बजे पतित पावनी खतरे के बिंदु को पार कर गई। गंगा खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर उपर बहने लगी। इसके चलते जनपद के तटवर्ती गांवों में पानी घुसना शुरू हो गया है। उधर सहायक नदियां भी पूरी तरह से उफान पर है। दिन में तीन बजे गंगा 63. 160 मीटर पहुंच गई थी जबकि खतरे का निशान 63.105 मीटर है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों के मुताबिक गंगा लाल निशान पार कर स्थिर हो चुकी है।
पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में वृद्घि हो रही थी। दो सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। रेवतीपुर ब्लाक के युवराजपुर गांव के उत्तर तरफ दियरा में बने लगभग 20 मीटर चौड़े बंधे को तोड़ बाढ़ का पानी गांव में प्रवेश कर गया। ताड़ीघाट फाटक के एक बार पुन: टूटने से पानी तटवर्ती गांव ताड़ीघाट मल्लाह बस्ती में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के बगल स्थित साधन सहकारी समिति को भी बाढ़ का पानी अपने आगोश में लेते हुये राष्ट्रीय राजमार्ग के पुल को पार करते हुये तेजी से कासिमपुर, डुहियां, चकिया, चकमजीठ, अंधारीपुर, भगरीथपुर, अन्देहरा और ढ़ढनी आदि गांवों मेें प्रवेश करना शुरू कर दिया है।
बहलोलपुर, सरैया, गरूआ मकसूदपुर, देवा बैरनपुर, युवराजपुर, बवाड़ा, कालूपुर, पटकनियां, घाटमपुर, गणहा छानबे, रामपुर, मेदिनीपुर, कल्यानपुर आदि तटवर्ती गांवों तथा मैदानी इलाकों डेढगावां, पकड़ी, उत्तरौली में बाढ़ का पानी प्रवेश करने को बेताब है। नगदीलपुर कामाख्या गहमर मुख्य मार्ग, हसनपुरा रेवतीपुर मार्ग, हसनपुरा वीरऊपुर मार्ग, नसीरपुर रेवतीपुर मार्ग, रेवतीपुर रामपुर मार्ग, पकड़ी डेढगावां रेवतीपुर वाईपास मार्ग, रेवतीपुर टौंगा संपर्क मार्ग सहित कई मार्गो पर बाढ़ के पानी के चलते आवागमन पूरी तरह बंद हो चुका है। इसके चलते लोगों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
बहलोलपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के किनारे महुआ बाबा का मन्दिर, डुहियां गंगा नदी के किनारे स्थित मजार, गरूआ मकसूदपुर किनारे अंत्येष्टि स्थल, मंदिर एवं मठ सहित कई विशालकाय अति प्राचीन पेड़ गंगा अपने आगोश में लेने को आतुर है। बाढ प्रभावित इलाकों के लोग स्वत: अपने परिवार के साथ सुरक्षित जगहों पर पलायन कर रहे हैं । बाढ़ के पानी से पशुओं का चारा, खेतों में बोई गई परवल, भिंडी, धान, मिर्चा कोहड़ा, लौकी सहित अन्य फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी है।
इससे किसानों को लाखों रूपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कटान भी काफी तेज गति से जारी है। इसके चलते अब तक तटवर्ती इलाके के आधा दर्जन गांवों की लगभग कई बीघा जमीन गंगा में समाहित हो चुकी है। नगर क्षेत्र में भी गंगा के पानी ने नालों के रास्ते प्रवेश करना शुरू कर दिया है। अगर जलस्तर में लगातार वृद्घि जारी रही तो नगर क्षेत्र के कई मुहल्लों में बाढ़ का पानी घुस जाएगा। हालांकि प्रशासन ने अभी तक जिले को बाढ़ग्रस्त घोषित नहीं किया है।