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गंगा में उफान, घाट डूबे, गांवों में घुसा पानी

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मुहम्मदाबाद-गाजीपुर मार्ग पर कठवामोड़ निर्माणाधीन पुल के नीचे सड़क पर लगे बेसों नदी के पानी से आ? - फोटो : GHAZIPUR
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गंगा का जलस्तर शनिवार को चेतावनी बिंदु से 32 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने के बाद तटवर्ती गांवों में जलप्लावन की स्थिति है। बाढ़ का पानी जिलाधिकारी बंगले के पास पहुंचने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर समेत सैदपुर के घाट और औड़िहार में आदित्य बिरला घाट पूरी तरह पानी में समा चुका है। रेवतीपुर क्षेत्र के कई गांवों में लोगों के घरों में पानी घुसने उनका आवागमन बंद हो गया है। तटवर्ती गांवों में फसल भी डूब गई है। कठवामोड़ स्थित एनएच-29 पर बना पुल जर्जर होने के कारण बनाए गए वाईपास मार्ग डूब जाने से बलिया-गाजीपुर मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूर्णतया ठप हो गया है।
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गंगा का जलस्तर अब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। शुक्रवार को चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। शनिवार को दिन में बारह बजे जलस्तर 63.230, दो बजे 63.290, तीन बजे 63.410 तथा शाम चार बजे जलस्तर 63.430 मीटर तक पहुंच गया था। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 32 सेंटीमीटर ऊपर हो गया है।
रेवतीपुर: गंगा का जलस्तर बढ़ने से बीरउपुर, हसनपुरा, नगदिलपुर, रामपुर गांव के लोगों के घरों में पानी घुस गया है जिससे लोगों का आवागमन बंद हो गया है। रेवतीपुर में लगभग 500 बीघे, रामपुर 100 बीघे, बीरउपुर करीब 100, नसीरपुर, परमानंदपुर में लगभग 200 तथा गोपालपुर में लगभग 50 बीघे में बोई गई बाजरा, ज्वार, परवल की फसल डूबने से किसानों को नुकसान पहुंचा है। अबतक प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। कई गांवों के लोगों को रहने के लिए जगह भी नहीं है।
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औड़िहार : सैदपुर में गंगा और गोमती उफान पर हैं। गंगा गोमती के संगम स्थल पटना-औड़िहार के पास दूर तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। सैदपुर में पक्काघाट, बूढ़ेनाथ महादेव घाट, संगत घाट, रामघाट, कोल्हुआ घाट, जौहरगंज एवं राम तवक्का घाट डूब गए हैं। रामतवक्का श्मशान घाट तक पानी आने से सड़कों के आसपास दाह संस्कार करना पड़ रहा है। पश्चिमी इलाके में गोमती के जलस्तर में 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ाव हो रहा था लेकिन शनिवार को यह घटकर तीन सेेंटीमीटर प्रति घंटा हो गया। गोमती की बाढ़ से अभी फसलों का नुकसान हो रहा है। तटवर्ती इलाकों के गांव के सैकड़ों बीघे में बोई फसलें पानी में डूब गई है। दो मीटर और पानी बढ़ जाने पर इस नदी का पानी गांव में पहुंच जाएगा। तब गौरी, तेतारपुर, गोरखा, खरौना, कुशही, सूरजभान चक, सिधौना, गदनपुर, भुजाड़ी, बहुरा, नेवादा आदि गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। उप जिलाधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत के लिए 27 बाढ़ राहत चौकियां एवं चार बाढ़ शिविर केंद्र स्थापित किए गए हैं। 30 बड़ी नाव के अलावा 15 मझोले आकार की नाव और उसके नाविक लगाए गए हैं। गोताखोर मल्लाहों की टीम भी लगाई गई है। जरूरत पड़ी तो एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई जाएगी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जा रहा है।
मौधा : गंगा का जलस्तर बढ़ने से खरौना, पटना, शादी भादी, औड़िहार, कुसुम्ही कला, हथौड़ा, जौहरगंज गांव के लोग सहमे हुए हैं। पटना और खरौना गांव के लोगों ने बताया कि गंगा का जलस्तर इसी तरह से बढ़ा तो जल्द ही उनके गांव टापू नजर आएंगे। रामानंद मठ के नजदीक बना अंत्येष्टि स्थल और औड़िहार के वराह धाम स्थित आदित्य घाट की सारी सीढ़ियां और घाट पर बना शिवालय का तीन चौथाई हिस्सा गंगा की बाढ़ में समा चुका है।
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