आदित्य सिंह के घर के बाहर बैठे लोग
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना से पूरा गांव शोक संतप्त है। इस हत्याकांड को लेकर मुख्य आरोपी सहायक शासकीय अधिवक्ता रामनरेश राय और उसके बेटे रवि राय को लेकर जनपद में पूरे दिन चर्चा होती रही। तीन से चार अन्य हत्याओं में भी इस पिता-पुत्र के हाथ होने की चर्चा है। इस मामले के सामने आने के बाद कई परिवार के लोग पुलिस के संपर्क में आ गए हैं। क्योंकि इस पिता-पुत्र के साथ प्रापर्टी का काम करने वाले अन्य लोग भी काफी दिनों से लापता चल रहे हैं।
शुक्रवार रात करीब 11.15 बजे पुलिस ने मीरनपुर हाइवे मोड़ के पास गडुआ मकसूदपुर निवासी विवेक राय उर्फ रावण, भगीरथपुर निवासी शशिभूषण शर्मा को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई में पुलिस की ओर से एक बदमाश को गोली लगी और मौके से एक बदमाश अंधेरे में भागने का प्रयास किया। जिसको घेर कर पुलिस टीम ने तमंचे के साथ पकड़ लिया। सीओ सिटी गौरव कुमार ने बताया कि प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड में पिता-पुत्र के अलावा दो अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
बीरबलपुर गांव निवासी जय सिंह के बेटे आदित्य सिंह (30) का शव शनिवार शाम घर पहुंचा। उसकी मां शोभा देवी और पत्नी संजना को शव के आने से पहले तक घटना की जानकारी नहीं थी। जैसे ही परिजन घर की दहलीज पर शव लेकर पहुंचे। मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी और मां आदित्य से मिलने के लिए पिछले सात महीने से परेशान थीं। वो बार-बार दोस्तों और परिजनों से उसके आने की खबर लेती रहती थी। हत्यारोपी दोस्त रवि राय मां और पत्नी को सात-आठ महीने से व्हाट्सएप के जरिए गुमराह कर रहा था।
जब भी आदित्य को फोन किया जाता था। उसके व्हाट्सएप से रवि मैसेज और वाइस कॉल कर परिजनों को भ्रमित कर देता था। आदित्य बनकर कभी नेपाल तो कभी कहीं और किसी काम से होने की बात कह देता था। ऐसे में देखते-देखते सात महीने का समय बीत गया। पत्नी हमेशा घर पर परेशान होकर रोती रहती थी। यही हाल मां शोभा देवी का भी था। दोनों को अनहोनी का अंदेशा हो गया था।
प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड में मुख्य रोपी मित्र रवि राय और उसके पिता रामनरेश राय का परिवार से अच्छा संबंध था। दोनों ही आदित्य के घर आते-जाते रहते थे। आदित्य के पिता जय सिंह की बुलेट को कुछ दिन पहले रवि ले गया था। जिसमें रवि ने जीपीएस लगवा दिया था। आदित्य के चचेरे भाई सुजीत सिंह का कहना है कि चाचा के बुलेट में जीपीएस लगाकर उनके खिलाफ भी हत्या की साजिश रची जा रही थी। उनके हरेक गतिविधि पर रवि नजर रखता था। वह जीपीएस उसके मोबाइल से जुड़ा था।