गाजीपुर में एनडीआरएफ और फ्लड यूनिट की तैनाती की गई है। पांच हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सूखे के कारण दलहन, तिलहन की बुआई प्रभावित हुई है। बहुत से किसानों की धान की खेती नहीं हो पाई है। सरकार सीमांत और लघु किसानों को दलहन, तिलहन और सब्जी खेती करने के लिए दो हजार मीट्रिक टन बीज दिए जाएंगे।
कार्यकम में बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि शासन की तरफ से बाढ़ के समय जो भी मदद हो सकती है, उसे दिया जा रहा है। कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, एमएलसी विशाल सिंह चंचल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही।
गाजीपुर जनपद में एक तरफ कम बारिश से खेती-किसानी दम तोड़ रही तो दूसरी ओर बाढ़ ने पीड़ा को कई गुना और बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में जनपद में प्रदेश के मुखिया के आगमन की सूचना पर लोगों को अपनी पीड़ा पर विशेष मरहम लगने की उम्मीद जगी थी। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए और हवाई सर्वेक्षण, राहत सामग्री का वितरण कर सरकार की ओर से बाढ़ और सूखा पीड़ितों को मदद करने का भरोसा देकर चले गए। ऐ
से ही पिछले साल की बाढ़ में मुख्यमंत्री का गहमर आगमन हुआ था और उस समय बाढ़ की विभीषिका से जनपद की पांच तहसीलें प्रभावित थीं। लेकिन तब भी लोगों को खास मदद या पैकेज से नाउम्मीद होना पड़ा था। इस साल गंगा का जलस्तर पिछले साल से भले थोड़ा कम है। लेकिन इस बार बाढ़ और सूखे की दोहरी मार से जनपद के हजारों किसान बेदम हो चुके हैं।
किसानों की दुर्दशा को देखते हुए पिछले दिनों बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।
उसमें बाकायदे इस बात का जिक्र था कि उनका संसदीय क्षेत्र गाजीपुर और बलिया के बहुत से गांव सूखा और बाढ़ से काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से जनपद को मदद मुहैया कराने की गुहार लगाई थी। जिसमें से किसी मांग पर अमल होता नहीं दिख रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि साल 2021 की बाढ़ की विभीषिका तो विधानसभा के ठीक पहले थी और साल 2022 की बाढ़ और सूखा की त्रासदी अगली लोकसभा से कुछ महीने पहले है। बावजूद इसके जनपद को विशेष सहायता न मिल पाना भाजपा शासन काल में कई सवाल खड़े करता है। आखिर बाढ़ और सूखे के दलदल में फंसे किसानों को सबल बनाने के लिए डबल इंजन की सरकार कौन से उपाय अपना रही है।