गंगा के बाढ़ के पानी डूबा कामाख्या धाम-नसीरपुर-रेवतीपुर मार्ग।
- फोटो : GHAZIPUR
गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। शनिवार को उफनाती गंगा की धाराओं में शेरपुर और सेमरा के मध्य में लगभग पांच बीघे कृषि योग्य भूमि नदी में समा गई। स्थिति देख कर 2019 में आई बाढ़ की याद करने लगे हैं। तटवर्ती गांवों के लोगों ने अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंगा सहित अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। इससे बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैलना शुरू हो गया है। सेमरा और शेरपुर के बीच गंगा में कटान शुरू हो चुका है। लोग अपनी आंखों के सामने अपनी कृषि भूमि को तिल-तिल कर गंगा में समाते देख रहे हैं और कुछ नहीं कर पा रहे हैं। सेमरा में बने ठोकर के आगे शेरपुर की तरफ कृषि भूमि का कटान शुरू हो गया है। शुक्रवार को जहां दो बीघा भूमि गंगा में समा गई थी वहीं शनिवार को लगभग पांच बीघे भूमि के गंगा में समा जाने से भूमि मालिकों को काफी दुख उठाना पड़ा। गंगा में जलस्तर बढ़ने के साथ ही क्षेत्र की छोटी नदियां भी उफान पर हैं। कठवामोड़ के पास बेसो नदी में पानी बढ़ने से गाजीपुर-हाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर कठवामोड़ पर बन रहे निर्माणाधीन पुलिया के नीचे बने डाइवर्जन सड़क पर पानी आ जाने से मुहम्मदाबाद से गाजीपुर आवागमन बंद हो गया है। अब छोटे वाहन चौरही एवं जंगीपुर होकर आ-जा रहे हैं। मगई नदी का भी जलस्तर बढ़ने लगा है।