जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। बीते वर्ष खरीफ फसल की बीमा धनराशि का एक करोड़ 78 हजार रुपये बीमा कंपनी ने लीड बैंकों को उपलब्ध करा दिया है। जिले में बीते वर्ष 2015 में कम वर्षा और पत्ती लपेटक रोग से धान की फसल पर काफी प्रभाव डाला था। इसके चलते धान की उत्पादकता मेें भी भारी गिरावट आई थी। मुआवजे का लाभ धान की फसल का बीमा कराने वाले किसानों को मिलेगा।
जिले में पिछले साल एक लाख 41 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रति हेक्टेयर 26 कुंतल धान के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया था। पिछले साल जून माह में उम्मीद से अधिक 165 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। उस समय किसानों ने धान की रोपाई भी शुरू नहीं की थी। जबकि जुलाई में 292 के सापेक्ष 195 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं अगस्त माह में 302 के सापेक्ष 262 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। इसके बाद सितंबर माह में 200 मिली के सापेक्ष जिले में मात्र 65 मिलीलीटर बारिश हुई। कम वर्षा होने से जहां धान की फसल में लपेटक रोग लग गए और धान की फसलें बर्बाद हो गईं।
जिले में बर्बाद हुई धान की फसलों का सर्वे बीमा कंपनी की ओर से किया गया था। सर्वे के आधार पर बीमा कंपनी ने 10 अप्रैल को जिले के सभी लीड बैकों को एक करोड़ 78 हजार रूपये उपलब्ध करा दिया है। इस संबंध में कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने बताया कि खरीफ फसल की बीमा धनराशि बीमा कंपनी की ओर बैंकों को उपलब्ध करा दी गई है।