गर्मी और बरसात में ट्रांसफार्मर फूंकने पर लोगों को पहले की तरह परेशान नहीं होना पड़ेगा। रौजा स्थित ट्रांसफार्मर वर्कशाप के साथ सैदपुर में नवनिर्मित वर्कशाप ने काम करना शुरू कर दिया है। जिससे जिले में रोजाना ट्रांसफार्मर मरम्मत होने की दर 40-42 हो गई है। जो जनपदवासियों की औसत मांग को पूरा करने में पर्याप्त होगी। मालूम हो कि सैदपुर में वर्कशाप का निर्माण वर्ष 2020 में शुरू हुआ। पिछले साल यहां उत्पादन शुरू होना था, लेकिन कोरोना संकट के चलते इसे पूरा होने में करीब दो साल का समय लग गया।
बीते शुक्रवार को सैदपुर वर्कशाप के एक शेड में ट्रांसफार्मर मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। अधिकारियों की मानें तो यहां रोजाना 20 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत होगी। वहीं, रौजा स्थित वर्कशाप से रोजाना 20-22 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत होती है। जिसमें सैदपुर वर्कशाप की 20 ट्रांसफार्मर की उत्पादन क्षमता बढ़ने से जिले की ट्रांसफार्मर की जरूरतें पूरी होंगी। सैदपुर वर्कशाप में दो शेड बनकर तैयार हैं। दूसरे शेड में भी मशीन लगाए जाएंगे। जिसके क्रियाशील होने पर अकेले सैदपुर वर्कशाप से ही जिले को रोजाना 35-40 ट्रांसफार्मर मरम्मत होकर मिलने लगेंगे। जिससे आने वाले दिनों में ट्रांसफार्मर की जरूरतें बढ़ने पर भी उसे पूरा करने में जनपद सक्षम होगा। सैदपुर में वर्कशाप नहीं होने से सैदपुर और नंदगंज इलाके के लोगों को चंदौली या अन्य जनपदों पर ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए भेजना पड़ता था।
रोजाना औसतन 40-45 ट्रासंफार्मरों की मांग रहती है
जुलाई, अगस्त और सितंबर में ट्रांसफार्मर की मांग बढ़ती है। इस दौरान गाजीपुर में औसतन रोजाना 40-45 ट्रासंफार्मरों की मांग रहती है। इस लिहाज से दोनों केंद्र यहां की ट्रांसफार्मर की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। वहीं, गर्मी की तैयारियों के लिहाज से रौजा वर्कशाप को 18 हजार लीटर और सैदपुर वर्कशाप को 24 हजार लीटर तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। जो अगले चार से पांच दिनों में उपलब्ध हो जाएगा।
वाराणसी मंडल में गर्मी की तैयारियों के लिहाज से एक हजार ट्रांसफार्मर वर्कशाप में अतिरिक्त रखे गए हैं। इसलिए कहीं भी ट्रांसफार्मर को लेकर कोई किल्लत नहीं होने वाली है। गाजीपुर में पहले समस्या थी, अब वहां भी मांग के अनुरूप ट्रांसफार्मर बनने लगे हैं।
श्याम गोपाल सक्सेना, अधिशासी अभियंता, वर्कशाप