गाजीपुर जिले के उसरी चट्टी में 15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी के काफिले पर पर हमला हुआ था। जिसमें मुख्तार के सरकारी गनर रामचंदर समेत दो लोगों की मौत हुई थी।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम (एमपी/एमएलए कोर्ट) रामसुध सिंह की अदालत में शनिवार को 21 वर्ष पुराने बहुचर्चित उसरी चट्टी हत्याकांड में अभियोजन की तरफ से गवाह रमेश राम की जिरह हुई। शेष जिरह के लिए नौ नवंबर की तिथि नियत की गई। इसके साथ ही दो दशक पुरानी वारदात का वह दौर लोगों के जेहन में फिर से ताजा हो गया। अदालत में अभियोजन की तरफ से गवाह रमेश राम की गवाही पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है जिस पर आज जिरह हुई।
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मालूम हो कि 15 जुलाई 2001 को उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर पहले से तैयार हमलावरों ने स्वचालित हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें मुख्तार अंसारी के सरकारी गनर रामचंदर उर्फ प्रदीप की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं घायल रुस्तम उर्फ बाबू की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
बृजेश और त्रिभुवन सिंह समेत 15 अज्ञात पर मुकदमा
हमलावरों में से एक की मौत हो गई थी। मुख्तार अंसारी के साथ चलने वाले अन्य लोगों एवं पुलिस कर्मियों को भी चोटें आईं थी। इस मामले में मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह एवं त्रिभुवन सिंह को नामजद करते अन्य 15 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने चार लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया था।
इसमें दो आरोपी की विचारण के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में अभियोजन के तरफ से गवाह रमेश राम की जिरह हुई, लेकिन पूरी न होने पर न्यायालय ने शेष जिरह के लिए 9 नवंबर की तिथि तय की है।